7.8% GDP Growth: तमाम चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने चौंकाया, अनुमान से बेहतर रही ग्रोथ

FY27 की पहली तिमाही में भारत की GDP 7.8% बढ़ी, RBI और रॉयटर्स के अनुमान से रही काफी आगे; निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने दिया मजबूत सहारा

kNEWS dESK- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई। खास बात यह है कि यह तेजी ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, पश्चिम एशिया में तनाव, सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियां और वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।

GDP का यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 फीसदी के अनुमान और रॉयटर्स पोल के 7.1 फीसदी के अनुमान से भी ऊपर रहा। इस बेहतर प्रदर्शन ने उन आशंकाओं को भी कमजोर किया है, जिनमें बाहरी दबावों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने की संभावना जताई जा रही थी।

पहली तिमाही के आंकड़ों में सबसे खास बात यह रही कि अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख हिस्सों ने एक साथ अच्छा प्रदर्शन किया। निजी खपत में 7.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन यानी निवेश में 11.9 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी हुई।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 9.2 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की। कंस्ट्रक्शन सेक्टर 7.7 फीसदी बढ़ा, जबकि यूटिलिटीज में 8.9 फीसदी का विस्तार हुआ। इन आंकड़ों के चलते माइनिंग में कमजोरी के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र की कुल वृद्धि 7.7 फीसदी रही।

सर्विस सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर सामने आया। इस क्षेत्र में करीब 10 फीसदी की वृद्धि हुई। फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 12.1 फीसदी का विस्तार दर्ज किया गया। वहीं ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन सेक्टर 8.5 फीसदी बढ़ा।

एक्सपोर्ट ने भी दिया मजबूत संकेत

वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और व्यापार संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत के एक्सपोर्ट में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सर्विसेज एक्सपोर्ट में तेजी देखने को मिली, जबकि मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट भी मजबूत बना रहा। दूसरी ओर, इंपोर्ट में 1.1 फीसदी की गिरावट आई, जिससे नेट एक्सपोर्ट का योगदान बेहतर हुआ।

कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.6 फीसदी रही। यह भले ही अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत नहीं बना, लेकिन इससे वह नकारात्मक झटका भी नहीं लगा जिसकी आशंका जताई जा रही थी।

क्यों जताई जा रही थी कमजोर ग्रोथ की आशंका?

भारत की अर्थव्यवस्था के सामने पहली तिमाही में कई बाहरी जोखिम थे। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को सबसे बड़ी चिंता माना जा रहा था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से इंपोर्ट बिल, महंगाई और घरेलू खर्च पर दबाव बढ़ने की आशंका थी।

इसके अलावा कमजोर वैश्विक मांग से एक्सपोर्ट प्रभावित होने, सप्लाई चेन में रुकावट आने और अनिश्चित माहौल के कारण निजी कंपनियों के निवेश में कमी की चिंता भी थी। मानसून को लेकर आशंकाएं ग्रामीण मांग पर संभावित असर की एक और वजह थीं।

इन्हीं जोखिमों के चलते RBI ने 7 फीसदी और रॉयटर्स पोल ने 7.1 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान जताया था। लेकिन वास्तविक आंकड़ा 7.8 फीसदी रहा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च का असर

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे लगातार बढ़ रहा सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर भी अहम माना जा रहा है। सरकार ने सड़क, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार निवेश किया है। इससे न सिर्फ मांग को समर्थन मिलता है, बल्कि कारोबार की लागत घटाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलती है।

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में केंद्र का कैपिटल खर्च 18.6 फीसदी बढ़ा। वहीं 2014-15 के बाद से सालाना कैपिटल खर्च करीब छह गुना बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।

बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर भी मजबूत

अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति में बैंकिंग और कॉरपोरेट बैलेंस शीट की बेहतर स्थिति भी महत्वपूर्ण है। बैंकों के बैड लोन में कमी आई है, कॉरपोरेट लेवरेज में सुधार हुआ है और क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। इससे कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ी है।

वहीं डेटा सेंटर, बिजली, मेटल और इंडस्ट्रियल क्षमता जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ने के संकेत मिले हैं। अगर यह निवेश आगे भी जारी रहता है तो सरकारी और निजी निवेश मिलकर विकास को ज्यादा टिकाऊ आधार दे सकते हैं।

घरेलू मांग ने भी दिया साथ

ऊंची ऊर्जा कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं ने खर्च में बड़ी कटौती नहीं की। वाहनों की बिक्री, ग्रामीण मांग और सर्विस सेक्टर में खपत मजबूत रही। टैक्स राहत, GST को तर्कसंगत बनाने, क्रेडिट की उपलब्धता और अपेक्षाकृत कम महंगाई ने भी घरेलू मांग को सहारा दिया।

भारत का बड़ा घरेलू बाजार भी वैश्विक परिस्थितियों के बीच अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत साबित हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर की एक साथ मजबूती ने भी किसी एक क्षेत्र में कमजोरी के असर को सीमित करने में मदद की।

क्या आगे भी जारी रहेगी 7 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ?

पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि ने वित्त वर्ष 2027 के आर्थिक विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निजी निवेश की यही रफ्तार आने वाली तिमाहियों में भी बनी रहेगी।

अगर डेटा सेंटर, बिजली, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल क्षमता में निवेश लगातार बढ़ता है तो इससे सरकारी और निजी कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। इससे 7 फीसदी से अधिक की लगातार ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार हो सकता है।

हालांकि भारत के सामने जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। तेल की कीमतें, वैश्विक ब्याज दरें, ट्रेड प्रतिबंध, जियोपॉलिटिकल तनाव और अंतरराष्ट्रीय मांग में बदलाव आगे भी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा मौसम और खाद्य कीमतों से जुड़े जोखिम भी बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ यह संकेत देती है कि बाहरी दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत लचीलापन दिखाया है। हालांकि लंबे समय तक तेज विकास के लिए रोजगार, उत्पादकता, मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धात्मकता और निजी निवेश में लगातार सुधार जरूरी होगा।

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