इजराइल में प्रधानमंत्री चुनने का तरीका बदलने की तैयारी, सीधे चुनाव के प्रस्ताव पर चर्चा

सरकार बनाने के संकट के बीच विपक्षी दलों की पहल, प्रस्ताव लागू होने पर अल्पमत सरकार बनाने का रास्ता खुलने की संभावना। कानून बदलने के लिए नेसेट के 61 सांसदों का समर्थन जरूरी।

Knews Desk – इजराइल में सरकार बनाने को लेकर जारी राजनीतिक संकट के बीच प्रधानमंत्री चुनने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी गठबंधन के दल प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव के लिए कानून लाने पर विचार कर रहे हैं। हिब्रू मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव का उद्देश्य अरब पार्टियों के समर्थन के बिना अल्पमत सरकार बनाने का रास्ता तलाशना है।

प्रस्ताव के तहत मतदाता संसद के चुनाव से अलग सीधे प्रधानमंत्री के लिए वोट कर सकेंगे। इस व्यवस्था में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार सीधे चुनाव जीतकर सरकार बनाने का दावा कर सकेगा। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अल्पमत सरकार किस तरह काम करेगी और उसे संसद का विश्वास कैसे हासिल करना होगा, यह कानून में बदलाव पर निर्भर करेगा।

चुनाव के बाद बहुमत नहीं जुटा पाए राजनीतिक गठबंधन

इजराइल में मंगलवार को हुए चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन और उनके विरोधियों, दोनों में से कोई भी 120 सदस्यों वाली संसद यानी नेसेट में बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सका। इसी वजह से सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।

विपक्षी दलों के बीच प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव इसी संकट से निकलने के संभावित रास्ते के रूप में चर्चा में है। इसके समर्थकों का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता करे और सरकार गठन के लिए अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भरता कम हो सके।

नेतन्याहू भी पहले रख चुके हैं ऐसा प्रस्ताव

इजराइल में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का विचार नया नहीं है। मार्च 2021 में हुए चुनाव के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ऐसा ही प्रस्ताव दिया था। उस समय भी किसी राजनीतिक दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और नेतन्याहू सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में मुश्किलों का सामना कर रहे थे।

इजराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया ‘बेसिक लॉ: द गवर्नमेंट’ के तहत निर्धारित होती है। मौजूदा व्यवस्था में नई सरकार को शपथ लेने से पहले नेसेट में विश्वास मत हासिल करना होता है। प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित कानून में बदलाव करना पड़ेगा, जिसके लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा।

फिलहाल यह प्रस्ताव विपक्षी दलों के बीच चर्चा के स्तर पर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे संसद में पेश किया जाएगा या नहीं और इसे जरूरी समर्थन मिल पाएगा या नहीं। यदि कानून में बदलाव होता है, तो इजराइल में प्रधानमंत्री चुनने और सरकार बनाने की मौजूदा प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन हो सकता है।

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