फ्रांस में फिर होगी मोदी-ट्रंप मुलाकात, G7 समिट में कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

Knews Desk– फ्रांस में अगले महीने आयोजित होने जा रहे G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की अहम मुलाकात होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया ईरान संकट, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों से जूझ रही है।

फ्रांस इस बार G7 समिट की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन 15 से 17 जून 2026 तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित होगा। इसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत में व्यापार, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा ईरान और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात भी बातचीत का अहम हिस्सा रहेंगे।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप G7 सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि ट्रंप इस मंच पर अमेरिकी व्यापार हितों, AI तकनीक और चीन की सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने जैसे मुद्दे उठाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के रिश्ते पहले कार्यकाल से ही चर्चा में रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच कई बार व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत केमिस्ट्री देखने को मिली है। इससे पहले दोनों नेता विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुलाकात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकती है।

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने फरवरी 2026 में पीएम मोदी को औपचारिक रूप से G7 समिट में शामिल होने का न्योता दिया था। फ्रांस चाहता है कि भारत वैश्विक आर्थिक संतुलन, नई साझेदारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाए। G7 सम्मेलन में इस बार वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा संकट, मिडिल ईस्ट तनाव, यूक्रेन युद्ध, AI गवर्नेंस और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। भारत की मौजूदगी को इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल साउथ के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-ट्रंप बैठक सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति और रणनीतिक समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और दुनिया नए भू-राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *