Knews Desk- जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 जुलाई को नई दिल्ली पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा, जो 3 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। यह बैठक दोनों देशों के बीच हर साल बारी-बारी से होने वाली परंपरागत उच्चस्तरीय वार्ता का हिस्सा है, जिसमें पिछला सम्मेलन टोक्यो में आयोजित किया गया था।
इस बार प्रधानमंत्री ताकाइची रोम से सीधे दिल्ली आ रही हैं, जहां उन्होंने पहले इटली की प्रधानमंत्री के साथ जापान की हिंद-प्रशांत रणनीति पर चर्चा की थी। उनका यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
निवेश और आर्थिक सहयोग पर जोर
इस दौरे में सबसे बड़ा एजेंडा निवेश और आर्थिक सहयोग रहेगा। पिछले वर्ष जापान ने अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब अमेरिकी डॉलर) निजी निवेश का लक्ष्य रखा था। इस यात्रा के दौरान इस निवेश योजना को जमीन पर उतारने और प्रगति की समीक्षा पर चर्चा होगी। टोयोटा त्सुशो, इतोचू और सुज़ुकी जैसी बड़ी जापानी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी इस दौरे का हिस्सा हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच एक उच्चस्तरीय बिजनेस डायलॉग भी प्रस्तावित है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत
रक्षा और समुद्री सुरक्षा भी बातचीत के प्रमुख विषय रहेंगे। दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन, नौसैनिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा तालमेल बढ़ाने पर विचार करेंगे। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह सहयोग और भी रणनीतिक महत्व रखता है।
सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
भारत और जापान सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और बैटरी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे, ताकि सप्लाई चेन में किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। इसके साथ ही मध्य-पूर्व संकट के कारण प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति को देखते हुए एलएनजी और ऊर्जा सुरक्षा पर भी बातचीत होगी।
बुलेट ट्रेन और जनसंपर्क बढ़ाने की योजना
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना भी चर्चा में रहेगी, जो जापानी ODA सहायता से चल रही है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में पांच लाख लोगों के आदान-प्रदान और 50 हजार भारतीय कुशल श्रमिकों को जापान भेजने की योजना पर भी बात होगी।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की अहम भूमिका
इस वर्ष जापान के ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) विजन के 10 साल पूरे हो रहे हैं, जिसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने की थी। साने ताकाइची को आबे की नीतियों की राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है। ऐसे में उनका यह दौरा भारत की भूमिका को इस रणनीति में और मजबूत करने का संकेत देता है।
कुल मिलाकर यह शिखर वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।