Knews Desk– सीरिया में इजराइल के हालिया हवाई हमलों के बाद इजराइल और तुर्की के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. सीरिया के उत्तर-पश्चिमी इदलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजराइल ने आठ हवाई हमले किए. यह एयरबेस तुर्की की सीमा से करीब 72 किलोमीटर दूर है. इजराइल ने इन हमलों को तुर्की की सीरिया में बढ़ती सैन्य मौजूदगी से जोड़ते हुए चेतावनी दी है, जबकि तुर्की और सीरिया ने इजराइल के आरोपों को खारिज किया है.
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय के मुताबिक, इजराइल और सीरिया के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक स्थिति बनाए रखने पर सहमति बनी थी. इजराइल का आरोप है कि सीरिया ने इस व्यवस्था को कमजोर करते हुए एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों को पहुंचने की अनुमति दी. इजराइल पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य मौजूदगी, जो दक्षिण की ओर बढ़ती है, उसकी सुरक्षा के लिए खतरा मानी जाएगी.
हमले के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य तैनाती स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो. हालांकि तुर्की ने इजराइल के दावे को गलत बताया है. अंकारा का कहना है कि एयरबेस पर उसकी स्थायी सैन्य मौजूदगी स्थापित करने की कोई योजना नहीं थी. तुर्की के सैन्य अधिकारी वहां प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग से जुड़े काम के लिए पहुंचे थे.इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इजराइल ने हमले से पहले तुर्की को कथित तौर पर कोई सूचना नहीं दी. अमेरिका के सीरिया-इराक विशेष दूत और तुर्की में राजदूत टॉम बैरक के मुताबिक, तुर्की की सेना ने इजराइली विमानों को अपनी दिशा में आते हुए देखा था. ऐसे में अगर तुर्की की सेना ने इसे अपने खिलाफ हमला समझकर जवाबी कार्रवाई की होती, तो दोनों देशों की सेनाएं सीधे आमने-सामने आ सकती थीं.
इस आशंका को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि तुर्की पहले भी सीरिया सीमा के पास एक विदेशी लड़ाकू विमान को मार गिरा चुका है. 2015 में तुर्की ने एक रूसी लड़ाकू विमान को मार गिराया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. अमेरिका ने भी इजराइल के हालिया हमले पर चिंता जताई है और माना है कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अनावश्यक तनाव बढ़ा सकती है.दरअसल, सीरिया में असद सरकार के पतन के बाद क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदले हैं. दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद अहमद अल-शरा सीरिया के राष्ट्रपति बने. तुर्की के नई सीरियाई सरकार के साथ करीबी संबंध हैं और वह सीरियाई सेना को प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग दे रहा है. तुर्की लंबे समय से उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है.
दूसरी ओर, इजराइल ने भी असद सरकार के पतन के बाद सीरिया के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं. ऐसे में सीरिया अब दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है. समस्या यह है कि दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी और प्रभाव के क्षेत्र एक-दूसरे के करीब आते जा रहे हैं.फिलहाल इजराइल और तुर्की के बीच सीधे युद्ध की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन अचानक सैन्य टकराव का खतरा जरूर बढ़ा है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने नेतन्याहू के आरोपों को खारिज करते हुए इजराइल की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सीरिया में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के ऑपरेशन के रास्ते में आती हैं, तो एक छोटी घटना भी बड़े संकट में बदल सकती है. इसलिए आने वाले दिनों में सीरिया में इजराइल और तुर्की की सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.