Knews Desk- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी संकट गहराता जा रहा है। पार्टी के कई विधायक नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आने लगे हैं, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और कई विधायक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। बागी खेमे का आरोप है कि चुनावी हार के कारणों की गंभीर समीक्षा नहीं की गई और पार्टी नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं तथा विधायकों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है। इसी वजह से कुछ विधायक नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी उठा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और ईडी की छापेमारी का भी असर देखने को मिल रहा है। कई नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं और पार्टी के भीतर नई रणनीति की मांग कर रहे हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों को विपक्ष की साजिश बता रहा है।
इस बीच पार्टी ने अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया है। कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है, जिससे असंतोष और बढ़ने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी विधायकों की संख्या बढ़ती है तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है।
ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। वहीं अभिषेक बनर्जी भी लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी यह खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।