डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम पड़ाव में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। राज्य में शनिवार को हुए पुनर्मतदान (Re-polling) के दौरान मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दोपहर तीन बजे तक राज्य के संवेदनशील मतदान केंद्रों पर 72.43% औसतन मतदान दर्ज किया गया है। वहीं, दूसरी ओर 4 मई को होने वाली मतगणना को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की फौज तैनात कर दी है।
पुनर्मतदान: डायमंड हार्बर और मगराहट में कड़ी टक्कर
शनिवार को हुए पुनर्मतदान में दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों पर सबकी नजरें टिकी रहीं। मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में दोपहर तीन बजे तक लगभग 72.50% मतदान हुआ, जबकि हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली डायमंड हार्बर विधानसभा सीट पर 72.36% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भारी सुरक्षा घेरे और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच मतदाताओं की लंबी कतारें यह स्पष्ट कर रही हैं कि बंगाल की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकार को लेकर कितनी सजग है।
मतगणना से पहले ‘पर्यवेक्षकों’ की भारी तैनाती
सोमवार से शुरू होने वाली मतगणना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा की आशंका को शून्य करने के लिए चुनाव आयोग ने कड़े कदम उठाए हैं। शनिवार को आयोग ने राज्य में 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षकों और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती का आदेश जारी किया।
4 मई का इंतजार: किसकी बनेगी सरकार?
पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान की प्रक्रिया दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में संपन्न हो चुकी है। अब पूरे देश की निगाहें 4 मई को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं। आयोग के इस ‘स्पेशल ऑब्जर्वर’ प्लान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी प्रकार का दबाव या धांधली न हो सके।