उत्तर प्रदेश में कुदरत का तांडव, आंधी, बारिश और बिजली ने ली 24 की जान

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम के रौद्र रूप ने भीषण तबाही मचाई है, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने, मकान ढहने और आंधी की वजह से कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है। सोमवार सुबह से ही बिगड़े मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ बल्कि बुनियादी ढांचा भी चरमरा गया। आगरा में एक हृदय विदारक घटना सामने आई जहां मकान का लिंटर गिरने से दो मासूम भाई-बहन मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं। इसी तरह संभल में छत गिरने से एक छात्रा की जान चली गई। पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के जिलों में कुदरत का सबसे ज्यादा कहर देखने को मिला है, जहां गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया और बागपत जैसे जिलों से लगातार जनहानि की खबरें आ रही हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं पर देखने को मिला असर

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं पर इस खराब मौसम का गहरा असर पड़ा है। तेज हवाओं के चलते सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने से कई जिलों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे लोग अंधेरे और जलभराव की दोहरी मार झेल रहे हैं। हवाई यातायात भी इससे अछूता नहीं रहा; गोरखपुर में कम दृश्यता और आंधी के कारण उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और कई यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खेती-किसानी के नजरिए से देखें तो यह मौसम किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चोट लेकर आया है। विशेष रूप से आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे बागवानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। गोंडा, बहराइच और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में आकाशीय बिजली ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं, जिससे पूरे प्रदेश में मातम का माहौल है।

24 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

संकट की इस घड़ी में मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए एक बार फिर ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने अपील की है कि खराब मौसम के दौरान लोग घरों से बाहर न निकलें और पेड़ों या जर्जर इमारतों के नीचे शरण लेने से बचें। राहत और बचाव कार्य के लिए जिला प्रशासन को मुस्तैद कर दिया गया है ताकि प्रभावितों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके। वर्तमान में प्रशासन की प्राथमिकता विद्युत व्यवस्था को बहाल करना और मलबे की चपेट में आए घायलों को बेहतर उपचार दिलाना है, लेकिन आगामी घंटों में और बारिश की चेतावनी ने राहत कार्यों में चुनौती बढ़ा दी है।