Knews Desk-पंजाब में नगर निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सामने आया एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक कार्रवाई और गरीबों की आजीविका के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। यह घटना एक सामान्य हटाने अभियान के दौरान हुई, जब नगर निगम की टीम सड़क किनारे लगे ठेले और अस्थायी दुकानों को हटाने पहुंची थी।

अभियान का उद्देश्य शहर में यातायात व्यवस्था सुधारना और सार्वजनिक स्थानों से अवैध अतिक्रमण हटाना बताया गया। इसी क्रम में एक महिला अचानक अधिकारियों के सामने आ गई और अपने ठेले पर रखे गैस सिलेंडर को न ले जाने की गुहार लगाने लगी। महिला हाथ जोड़कर रोते हुए बार-बार यही कहती रही कि “सिलेंडर मत ले जाओ, इसी से मेरे बच्चों का पेट भरता है।”महिला ने बताया कि उसका पूरा परिवार इसी छोटे ठेले और गैस सिलेंडर के सहारे जीवन यापन करता है। उसके अनुसार यह ठेला ही उसकी आजीविका का एकमात्र साधन है, जिससे वह रोज़ कमाकर अपने बच्चों का पेट भरती है। यदि यह साधन भी छिन गया तो उसके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
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इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी राहगीर ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो में महिला की लाचारी और अधिकारियों के सामने उसकी गुहार लोगों को भावुक कर रही है। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए इस वीडियो को लाखों व्यूज़ और हजारों प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं।
सोशल मीडिया पर कई लोग महिला के समर्थन में उतर आए हैं और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मानवीय पहलू को ध्यान में रखने की बात कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग नगर निगम की कार्रवाई को नियमों के तहत सही ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण से ट्रैफिक बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, इसलिए कार्रवाई आवश्यक है।
नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई किसी की आजीविका छीनने के लिए नहीं बल्कि शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार सभी स्ट्रीट वेंडर्स के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाती है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं होता।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहरी विकास और नियमों के पालन के साथ-साथ गरीब तबके की आजीविका की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है ताकि किसी की रोज़ी-रोटी प्रभावित न हो। यह घटना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रह गई, बल्कि एक मानवीय संवेदना का मुद्दा बन गई है, जो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।