डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए जारी मतगणना के बीच चुनाव आयोग ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को मतगणना के रुझानों में बढ़ते राजनीतिक पारे को देखते हुए आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि राज्य के किसी भी कोने में जीत का जश्न मनाने के लिए रैलियां या विजय जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है।
जश्न पर पाबंदी: सुरक्षा कारणों का दिया हवाला
विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने पत्रकारों से औपचारिक बातचीत में कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी विजयी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को सड़क पर शक्ति प्रदर्शन या जुलूस निकालने की इजाजत नहीं होगी। आयोग का यह फैसला राज्य में चुनाव बाद होने वाली संभावित हिंसा और तनाव को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतगणना केंद्रों के बाहर और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। यदि कोई भी दल इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शांति बनाए रखें।
एजेंटों की शिकायतों पर आयोग का कड़ा रुख
मतगणना की प्रक्रिया के बीच एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सुबह से ही विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से यह शिकायतें आ रही थीं कि उनके काउंटिंग एजेंटों को समय पर मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया या वे किन्हीं कारणों से समय पर वहां नहीं पहुंच सके। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर उनके एजेंटों को डराया-धमकाया गया, जिससे वे केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए। इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुब्रत गुप्ता ने कहा कि”आयोग इन शिकायतों को बहुत गंभीरता से ले रहा है। एजेंटों के केंद्रों तक न पहुंच पाने के पीछे के तकनीकी और सुरक्षा कारणों की गहन जांच की जा रही है। जहां कहीं भी ऐसी समस्या आई है, उसे तुरंत सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं।”
मतगणना केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच रुझानों में जारी कांटे की टक्कर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। मतगणना प्रक्रिया की शुचिता और शांति बनाए रखने के लिए केंद्रों की सुरक्षा का पूरा जिम्मा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को सौंपा गया है। इसके साथ ही, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत कई संवेदनशील मतगणना केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई है, ताकि भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सके। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी मतगणना प्रक्रिया की सीसीटीवी और वीडियो ग्राफी भी कराई जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।