डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। सुबह से आ रहे रुझानों में जहाँ भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है, वहीं नंदीग्राम के विधायक और भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक ऐसा दावा किया है जिसने राजनीतिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार बंगाल में न केवल हिंदू बहुल इलाकों में, बल्कि मुस्लिम बहुल बूथों पर भी ‘कमल’ खिलता नजर आ रहा है। यह दावा ममता बनर्जी के उस पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की ओर इशारा करता है, जिसे टीएमसी अपना सबसे मजबूत किला मानती रही है।
मालदा, मुर्शिदाबाद और दिनाजपुर में दिख रहा वोटों का बिखराव
काउंटिंग सेंटर के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों से आ रहे रुझान चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा: “2021 और 2024 की तरह इस बार मुस्लिम वोटों का एकतरफा ध्रुवीकरण टीएमसी के पक्ष में नहीं है। इन क्षेत्रों में मुस्लिम वोटों में स्पष्ट बिखराव और ‘क्रैक’ दिखाई दे रहा है। अल्पसंख्यक समाज के लोग भी अब विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा के साथ आ रहे हैं।”
नंदीग्राम में फिर ‘शुभेंदु’ का जलवा?
अपनी प्रतिष्ठा की सीट नंदीग्राम के बारे में जानकारी साझा करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि शुरुआती दौर की मतगणना उनके लिए काफी उत्साहजनक रही है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पहले राउंड में 14 बूथों की गिनती पूरी होने के बाद वे 3000 से अधिक वोटों के अंतर से आगे चल रहे हैं। शुभेंदु ने विशेष रूप से नंदीग्राम के चुनावी गणित पर जोर देते हुए उल्लेख किया कि जिन 14 बूथों की गिनती हुई है, उनमें से 5 बूथ मुस्लिम बहुल थे, जहाँ से उन्हें जनता का अप्रत्याशित और बड़ा समर्थन प्राप्त हुआ है। उनके मुताबिक, मुस्लिम बहुल इलाकों से मिल रही यह बढ़त इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अब जनता तुष्टिकरण की राजनीति से ऊब चुकी है और विकास के नाम पर बदलाव चाहती है। शुभेंदु अधिकारी के इन दावों ने टीएमसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है। बंगाल की राजनीति में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिले हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। यदि अधिकारी का दावा सच साबित होता है और भाजपा इन जिलों में सेंध लगाने में कामयाब रहती है, तो ममता बनर्जी के लिए सत्ता की कुर्सी बचाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।