क्या AI समरी खत्म कर देगी न्यूज वेबसाइट्स की जरूरत? पब्लिशर्स की बढ़ी चिंता

Knews Desk– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर मीडिया और जर्नलिज्म पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गूगल समेत कई बड़ी टेक कंपनियां ऐसे AI सर्च टूल्स लॉन्च कर रही हैं, जो यूजर्स को सीधे सवालों के जवाब और खबरों का सारांश देने लगे हैं। इससे न्यूज वेबसाइट्स पर क्लिक करने की जरूरत कम होती जा रही है, जिसने न्यूज पब्लिशर्स की चिंता बढ़ा दी है।

AI समरी कैसे बन रही है खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित सर्च फीचर्स न्यूज आर्टिकल, ब्लॉग और सोशल मीडिया पोस्ट को स्कैन करके कुछ सेकंड में उसका सारांश तैयार कर देते हैं। यूजर को पूरी खबर पढ़ने के लिए वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि न्यूज वेबसाइट्स का ट्रैफिक घटने का खतरा बढ़ रहा है।

टेक लॉयर और AI गवर्नेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI समरी अब “कंटेंट डिस्कवरी” से आगे बढ़कर “कंटेंट रिप्लेसमेंट” का काम कर रही है। यानी AI केवल खबर ढूंढने में मदद नहीं कर रहा, बल्कि खुद ही खबर का विकल्प बनता जा रहा है। इससे मीडिया कंपनियों की कमाई और डिजिटल विज्ञापन पर सीधा असर पड़ सकता है।

भारत में क्या कहता है कानून?

भारत में अभी AI और न्यूज कंटेंट को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। हालांकि कॉपीराइट एक्ट और IT एक्ट कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं, लेकिन जनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल ने नई कानूनी बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AI किसी रिपोर्ट की मुख्य जानकारी सीधे यूजर तक पहुंचा दे, तो यह मूल कंटेंट की आर्थिक वैल्यू को नुकसान पहुंचा सकता है।

केंद्रीय मंत्रीअश्विनी वैष्णव भी कह चुके हैं कि टेक कंपनियों को कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के साथ उचित राजस्व साझेदारी करनी चाहिए। वहीं Narendra Modi ने भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिम्मेदार AI गवर्नेंस की जरूरत पर जोर दिया है।

दुनिया में बदल रहे नियम

AI और कॉपीराइट को लेकर दुनिया के कई देशों में नए नियम बनाए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने टेक कंपनियों और न्यूज पब्लिशर्स के बीच भुगतान मॉडल लागू किया है। चीन ने AI से बने कंटेंट को लेबल करना जरूरी कर दिया है। वहीं यूरोप में भी न्यूज कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर लाइसेंसिंग नियम लागू किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI सर्च टूल्स की वजह से न्यूज वेबसाइट्स की रीडरशिप लगातार घटती रही, तो भविष्य में स्वतंत्र पत्रकारिता आर्थिक संकट में पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले समय में AI और मीडिया के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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