KNEWS DESK- भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय कार्यक्रम में चिप निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और इस क्षेत्र में निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने की क्षमता पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। सरकार के अनुसार, 2014-15 में देश में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान तैयार किया जाता था, जो 2024-25 में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात 38 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
मोबाइल फोन निर्माण में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2014-15 में भारत में करीब 18 हजार करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बनते थे, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन का निर्यात भी 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। सरकार के मुताबिक, देश में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन के आयात पर निर्भरता भी काफी कम हुई है।
सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए सरकार की योजना
भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2022 में Semicon India Programme शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत चिप डिजाइन, निर्माण, टेस्टिंग और पैकेजिंग से जुड़े कामों को देश में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, अब तक करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें Micron और Kaynes के दो प्लांट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। दो अन्य प्लांट्स के भी इस साल शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
छात्रों को चिप डिजाइन की ट्रेनिंग
सेमीकंडक्टर सेक्टर में कुशल लोगों की जरूरत को देखते हुए छात्रों को भी चिप डिजाइन से जुड़े संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के मुताबिक, आठ कंपनियों के डिजाइन टूल्स 315 यूनिवर्सिटीज को मुफ्त दिए गए हैं। इनका इस्तेमाल 200 लाख घंटे से ज्यादा हो चुका है।
इन संसाधनों की मदद से 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार किए हैं। सरकार ने वीडियो कैमरा, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, बिजली मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट और ब्रॉडबैंड जैसे क्षेत्रों के लिए 24 चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें से 14 कंपनियों को अपने उत्पाद बाजार में लाने के लिए निवेशकों से 650 करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद मिली है। अब तक सात चिप्स सफलतापूर्वक बनाए जा चुके हैं।
छह राज्यों में बन रहे सेमीकंडक्टर प्लांट
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में लगाए जा रहे हैं। सरकार को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स बनाने की योजना के तहत 249 आवेदन भी मिले हैं। इनमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कैपेसिटर और अन्य जरूरी सामान बनाने के प्रस्ताव शामिल हैं।
गुजरात में Micron Technology करीब 22,516 करोड़ रुपये की लागत से DRAM और NAND की टेस्टिंग और पैकेजिंग यूनिट तैयार कर रही है। इसकी क्षमता हर सप्ताह करीब 1.4 करोड़ यूनिट तैयार करने की बताई गई है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात में ताइवान की PSMC कंपनी के साथ मिलकर 91,526 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रही है। इसका लक्ष्य हर महीने 50 हजार वेफर तैयार करना है। वेफर सिलिकॉन की पतली परत होती है, जिस पर कई चिप्स बनाए जाते हैं। कंपनी असम में भी 27,120 करोड़ रुपये की पैकेजिंग यूनिट बना रही है।
गुजरात में CG Power और Kaynes Technology के प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश में वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट्स और Foxconn India मिलकर करीब 3,706 करोड़ रुपये की यूनिट तैयार कर रही हैं। यहां डिस्प्ले में इस्तेमाल होने वाली चिप्स बनाई जाएंगी।
ओडिशा में 3D Glass Solutions और SiCSem के प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। पंजाब में Continental Device India अपनी यूनिट का विस्तार कर रही है। आंध्र प्रदेश में Advanced System in Package Technologies करीब 480 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर यूनिट तैयार कर रही है।
रोजगार और विदेशी सहयोग पर जोर
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र से करीब 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इनमें लगभग 12 लाख नौकरियां मोबाइल फोन निर्माण से जुड़ी हैं। फैक्ट्री में काम करने के अलावा सप्लाई चेन और सामान पहुंचाने से जुड़े रोजगार भी इसमें शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत ने अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, सिंगापुर और नीदरलैंड के साथ समझौते किए हैं। भारत में चिप निर्माण से जुड़े इन प्रोजेक्ट्स के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इन यूनिट्स के पूरी तरह तैयार होने और उत्पादन बढ़ने से देश के सेमीकंडक्टर सेक्टर में नई क्षमताएं विकसित हो सकती हैं।