नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, अंतरिम जमानत बरकरार

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े 6 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दी गई थी।

Knews Desk – मिलन प्रधान पर हत्या के आरोप हैं। उन्हें खासतौर पर नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि वोटिंग खत्म हो चुकी है, वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होनी है और उन्हें 21 अक्टूबर को सरेंडर करना है। उन्हें 20 अक्टूबर तक जमानत दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही प्रधान के खिलाफ कुछ गंभीर अपराधों के मामले हैं, लेकिन उन्हें अंतरिम जमानत मुख्य रूप से चुनाव लड़ने और वोटों की गिनती में शामिल होने के लिए दी गई है। अगर प्रधान अंतरिम जमानत को बढ़ाने या उसे रेगुलर जमानत में बदलने की मांग करते हैं, तो पश्चिम बंगाल सरकार के सभी तर्क खुले रहेंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने मामले के गुण-दोष को लेकर कोई राय नहीं दी है।

हाल ही में राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने अपील पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। SG मेहता ने कहा था कि मिलन प्रधान पर हत्या के आरोप हैं और उन्हें खासतौर पर नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए जमानत दी गई है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस मामले पर गुरुवार से पहले सुनवाई की जाए, क्योंकि चुनाव 6 अक्टूबर को होने वाला है।

हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवार को सुनवाई के अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को, यानी वोटिंग से एक दिन पहले होगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह राज्य की याचिका को खारिज कर देगा। CJI ने कहा, “हम इसे खारिज कर देंगे। लेकिन कल नहीं, हम इसे सोमवार को खारिज करेंगे।”

इससे पहले राज्य ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष के 29 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। इसी आदेश के तहत कांग्रेस नेता प्रधान को 2007 के 6 मामलों में अंतरिम जमानत दी गई थी। इनमें से 4 मामलों में हत्या के आरोप हैं, जबकि अन्य मामलों में दंगा कराने या फिर अन्य तरह के अपराध करने के आरोप भी शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने प्रधान को 6 अक्टूबर के नंदीग्राम उपचुनाव में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए अंतरिम राहत दी थी। साथ ही कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश भी दिया था।

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद 18 सितंबर को प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया था। उनकी गिरफ्तारी 2007 के जमीन अधिग्रहण-विरोधी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं के सिलसिले में दर्ज मामलों से जुड़ी थी। गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए मिलन ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ये मामले करीब 2 दशक पुराने हैं और उन्हें चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

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