Knews Desk- Instagram के विज्ञापन नेटवर्क पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले अकाउंट्स और वेबसाइट्स का प्रचार करने के गंभीर आरोप लगे हैं.
सरकार पूछेगी Meta से ये सवाल
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय Meta से यह स्पष्ट जवाब मांगेगा कि ऐसे आपत्तिजनक विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे और क्यों दिखाई दिए। इसके साथ ही सरकार यह भी जानना चाहती है कि इन्हें रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सरकार ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर चिंता जताई है। फिलहाल Meta की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है। आरोप है कि इंस्टाग्राम के विज्ञापन नेटवर्क पर ऐसे अकाउंट्स और वेबसाइट्स का प्रचार किया गया, जो बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देते हैं। इस मामले के सामने आने के बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय जल्द ही Meta से जवाब-तलब करेगा। सरकार का साफ कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि इंस्टाग्राम पर कुछ पेड विज्ञापनों के जरिए आपत्तिजनक सामग्री को प्रमोट किया जा रहा था। इन विज्ञापनों के माध्यम से यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों तक पहुंचाया जा रहा था, जहां कथित तौर पर यह अवैध कंटेंट 99 रुपये तक में उपलब्ध कराया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि इंस्टाग्राम का विज्ञापन सिस्टम इन विज्ञापनों को मंजूरी मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाता है।
कानून क्या कहता है
भारत में बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री का निर्माण, प्रसारण, प्रचार या वितरण एक गंभीर अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और 67B के तहत ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। इसके अलावा आईटी नियम 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे गैरकानूनी कंटेंट को समय रहते हटाएं। साथ ही POCSO कानून के तहत भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
मामला कितना गंभीर हैं ?
ऑनलाइन बाल सुरक्षा को लेकर भारत पहले से ही गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत से बच्चों से जुड़े यौन शोषण मामलों में करीब 19 लाख साइबरटिपलाइन शिकायतें दर्ज की गईं। इस मामले में भारत अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
अब आगे क्या ?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि Meta सरकार के सवालों का क्या जवाब देती है और वह अपनी विज्ञापन मॉडरेशन प्रणाली में क्या बदलाव करती है। केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है। इससे पहले कई OTT प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
हाल ही में WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी सरकार ने Meta से स्पष्टीकरण मांगा था। ऐसे में इंस्टाग्राम पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद Meta को तलब किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर आगे और कड़े कदम उठा सकती है।