Knews Desk– भारत के तेजी से बढ़ते रिटेल लोन और फाइनेंशियल सर्विसेज बाजार में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की लोन कंपनी Jio Credit के बीच करीब 1.9 अरब डॉलर की बड़ी डील सामने आई है। इस निवेश के जरिए बैंक ऑफ अमेरिका Jio Credit में अधिकतम 49.9 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। शुरुआत में उसे करीब 26.5 फीसदी हिस्सेदारी मिलने की बात कही गई है। इस डील को भारत के तेजी से विस्तार कर रहे क्रेडिट बाजार में एक बड़े वैश्विक वित्तीय संस्थान के प्रवेश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस साझेदारी के तहत बैंक ऑफ अमेरिका, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Jio Credit Limited में इक्विटी शेयर और वारंट के जरिए निवेश करेगा। शुरुआत में BofA की हिस्सेदारी लगभग 26.5 फीसदी होगी। बाद में वारंट का इस्तेमाल करने पर यह हिस्सेदारी बढ़कर 49.9 फीसदी तक पहुंच सकती है। हालांकि, इस सौदे को पूरा करने के लिए जरूरी नियामकीय और अन्य मंजूरियां अभी बाकी हैं। इसलिए अंतिम हिस्सेदारी और डील की पूरी संरचना मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगी।इस डील को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज अपने वित्तीय कारोबार में बड़े वैश्विक साझेदारों को जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। कंपनी के एसेट मैनेजमेंट कारोबार में ब्लैकरॉक और इंश्योरेंस कारोबार में Allianz जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नाम पहले ही साझेदार बन चुके हैं। अब बैंक ऑफ अमेरिका के साथ प्रस्तावित साझेदारी जियो के लोन कारोबार को वैश्विक वित्तीय अनुभव और पूंजी का समर्थन दे सकती है।
Jio Credit की मौजूदा स्थिति भी इस डील को खास बनाती है। 30 जून 2026 तक कंपनी के पास करीब 30,667 करोड़ रुपये का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) था। कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 22.35 फीसदी बताया गया है। इसके लोन पोर्टफोलियो में लगभग 46 फीसदी हिस्सा होम लोन का है, जबकि करीब 10 फीसदी लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज और 44 फीसदी कॉरपोरेट तथा SME लोन का है। इससे साफ है कि कंपनी सिर्फ पर्सनल लोन के क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि होम लोन और बिजनेस फाइनेंस जैसे बड़े सेगमेंट में भी मौजूदगी बढ़ा रही है।जियो और बैंक ऑफ अमेरिका की साझेदारी में दोनों कंपनियों की अलग-अलग क्षमताएं एक-दूसरे के काम आ सकती हैं। जियो के पास भारत में बड़ा डिजिटल नेटवर्क, ग्राहकों तक पहुंच और स्थानीय बाजार की मजबूत समझ है। दूसरी तरफ बैंक ऑफ अमेरिका के पास वैश्विक वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग कारोबार का लंबा अनुभव है। ऐसे में दोनों कंपनियों का साथ आना भारतीय वित्तीय बाजार में नए उत्पादों और सेवाओं के विस्तार का रास्ता खोल सकता है।
बैंक ऑफ अमेरिका के लिए भी यह निवेश रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां क्रेडिट की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर मध्यम वर्ग, छोटे कारोबारियों और नए उपभोक्ताओं के बीच लोन की पहुंच बढ़ने से रिटेल फाइनेंस का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में Jio Credit के जरिए BofA को भारतीय कंज्यूमर और लोन मार्केट में अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत स्थिति बनाने का मौका मिल सकता है।हालांकि, इस डील से जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को कितना वास्तविक फायदा होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। रेगुलेटरी मंजूरियों के बाद दोनों कंपनियों की साझेदारी किस तरह आगे बढ़ती है और Jio Credit अपने लोन कारोबार का कितना विस्तार कर पाती है, इस पर बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल यह सौदा इस बात का संकेत है कि भारत का तेजी से बढ़ता लोन बाजार अब दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों के लिए भी एक आकर्षक अवसर बन चुका है।