AI कंटेंट पकड़ना होगा आसान! Claude के हर जवाब में छिपा होगा खास वॉटरमार्क

Knews Desk– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब यह पता लगाना आसान हो सकता है कि कोई कंटेंट इंसान ने लिखा है या AI की मदद से तैयार किया गया है. AI कंपनी Anthropic ने अपने Claude मॉडल से तैयार किए गए टेक्स्ट के लिए एक नया हिडन वॉटरमार्किंग सिस्टम पेश किया है. खास बात यह है कि यह वॉटरमार्क टेक्स्ट में दिखाई नहीं देगा. इसके बजाय Claude शब्दों का चयन करते समय एक खास पैटर्न बनाएगा, जिसे विशेष डिटेक्शन सिस्टम की मदद से पहचाना जा सकेगा.

Anthropic के मुताबिक, इस तकनीक का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी टेक्स्ट को तैयार करने में Claude की भूमिका रही है या नहीं. अगर कोई यूजर Claude से कंटेंट तैयार करता है और उसमें बहुत ज्यादा बदलाव नहीं करता, तो भविष्य में इस सिस्टम के जरिए यह पता लगाने की संभावना होगी कि उस टेक्स्ट को AI मॉडल ने तैयार किया था.कंपनी के अनुसार, Claude जब दो या उससे ज्यादा समान रूप से उपयुक्त शब्दों में से किसी एक को चुनता है, तो सिस्टम उसकी रैंडमनेस को एक खास तरीके से नियंत्रित करेगा. इससे पूरे टेक्स्ट में एक विशेष पैटर्न तैयार होगा. यह पैटर्न सामान्य पाठक को दिखाई नहीं देगा, लेकिन एक खास डिटेक्शन सिस्टम और सिक्योरिटी की मदद से इसकी पहचान की जा सकेगी. Anthropic का कहना है कि इस प्रक्रिया में Claude को अजीब, असामान्य या जबरदस्ती चुने गए शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.

कंपनी ने इसके लिए Google DeepMind की 2024 में प्रकाशित SynthID-Text तकनीक के एक वर्जन का इस्तेमाल किया है. Anthropic की इंटरनल टेस्टिंग में दावा किया गया कि इस सिस्टम से कंटेंट की गुणवत्ता, क्रिएटिविटी या पढ़ने के अनुभव पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ा. यानी यूजर को सामान्य Claude जवाब और वॉटरमार्क वाले जवाब के बीच कोई स्पष्ट अंतर महसूस नहीं होना चाहिए.हालांकि, इस सिस्टम की कुछ सीमाएं भी हैं. हिडन वॉटरमार्क यह संकेत दे सकता है कि किसी टेक्स्ट को तैयार करने में Claude की भूमिका रही है, लेकिन यह किसी कंटेंट की पूरी उत्पत्ति को साबित नहीं करेगा. इसके जरिए यूजर की पहचान, उसकी संस्था या उसकी बातचीत से जुड़ी निजी जानकारी भी सामने नहीं आएगी. यह भी जरूरी नहीं कि सिस्टम किसी ऐसे टेक्स्ट को पहचान सके जिसे दूसरे AI मॉडल से तैयार किया गया हो.

छोटे टेक्स्ट में वॉटरमार्क की पहचान कम भरोसेमंद हो सकती है, क्योंकि सिस्टम के पास शब्दों के पैटर्न का विश्लेषण करने के लिए कम सामग्री होती है. इसके अलावा तथ्यात्मक लेखन, प्रूफरीडिंग और कोड जैसे मामलों में भी इसकी क्षमता सीमित हो सकती है, क्योंकि इनमें शब्दों के चुनाव की गुंजाइश अपेक्षाकृत कम होती है.Anthropic के मुताबिक, हल्की एडिटिंग के बाद भी वॉटरमार्क बने रहने की संभावना है. लेकिन अगर किसी टेक्स्ट को पूरी तरह से दोबारा लिखा जाता है, तो मूल वॉटरमार्क हट सकता है. Claude से किए गए अनुवादों में भी वॉटरमार्क मौजूद रह सकता है, क्योंकि ऐसे मामलों में भी शब्दों का चुनाव Claude करता है. कंपनी एक डिटेक्शन API पर भी काम कर रही है, जिसके जरिए यूजर और थर्ड पार्टी अपने टेक्स्ट में इस वॉटरमार्क की जांच कर सकेंगे.

Anthropic सिर्फ टेक्स्ट तक ही सीमित नहीं रहना चाहता. Claude से बनाई या प्रोसेस की गई कुछ सपोर्टेड इमेज फाइल्स के लिए C2PA Content Credentials का भी इस्तेमाल किया जाएगा. PNG, JPG और SVG जैसी फाइल्स में क्रिप्टोग्राफिक तरीके से साइन किया गया मेटाडेटा यह संकेत दे सकता है कि फाइल को तैयार करने या प्रोसेस करने में Claude की भूमिका रही है. इसमें यूजर की निजी जानकारी शामिल नहीं होगी.Anthropic इस वॉटरमार्किंग सिस्टम को दुनियाभर में लागू कर रहा है. कंपनी के मुताबिक, फिलहाल इसे अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित करने का भरोसेमंद तरीका उपलब्ध नहीं है. यह कदम यूरोपीय संघ के AI Act से जुड़ी AI कंटेंट पारदर्शिता की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है. Anthropic ने जुलाई 2026 में AI से बने कंटेंट की पारदर्शिता से जुड़े EU Code of Practice पर हस्ताक्षर किए थे. कंपनी आने वाले महीनों में 2 अगस्त 2026 से पहले लॉन्च किए गए Claude मॉडल्स में भी वॉटरमार्क जोड़ने पर काम कर रही है.

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