KNEWS DESK- योग गुरु बाबा रामदेव ने देश में धर्म और जाति को लेकर चल रही बहस के बीच कहा है कि भारत में न तो हिंदू खतरे में है और न ही मुसलमान, क्षत्रिय, ब्राह्मण या कोई अन्य जाति। उनके मुताबिक, देश के सामने असली चुनौती बच्चों, युवाओं और भारत के वर्तमान तथा भविष्य को लेकर है।
सोमवार को रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा कि कुछ लोग अपने आंदोलन के लिए देश के बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य संविधान और लोकतंत्र की रक्षा, बेहतर शिक्षा और मजबूत चिकित्सा व्यवस्था जैसे मुद्दे होने चाहिए। आंदोलन किसी एक व्यक्ति या नेता को केंद्र में रखकर नहीं चलाया जाना चाहिए।
रामदेव ने कहा कि देश में इस समय यह सोच उचित नहीं है कि केवल एक प्रधानमंत्री के आने से सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उनके मुताबिक, देश की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
मोदी की नीतियों की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर बात करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि उनके कार्यकाल में देश में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ये उपलब्धियां नजर नहीं आतीं, लेकिन किसी भी सरकार या व्यवस्था का मूल्यांकन हमेशा न्यायपूर्ण नजरिए से किया जाना चाहिए।
रामदेव ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति या विचार के प्रति पूर्वाग्रह के कारण देश में हो रहे सकारात्मक बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से हर मुद्दे को संतुलित और निष्पक्ष दृष्टि से देखने की अपील की।
मतांतरण और धार्मिक उत्पीड़न पर क्या बोले?
छत्तीसगढ़ में मतांतरण रोधी कानून और धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि इन मुद्दों को राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में किसी धर्म को खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू, इस्लाम या ईसाई किसी को भी खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, वास्तविक चिंता भारत की प्रतिष्ठा, सम्मान और मर्यादा को लेकर होनी चाहिए।
रामदेव ने कहा कि अतीत में देश में जो भी मतांतरण हुए हैं, उनके बारे में अलग-अलग तरह के विचार हो सकते हैं, लेकिन भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति का धार्मिक आधार पर उत्पीड़न न हो।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को लेकर बड़ा दावा
बाबा रामदेव ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि एक दिन ये तीनों देश फिर भारत का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने इस संबंध में लोगों से धैर्य रखने की बात कही। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बदलाव किसी जल्दबाजी के बजाय समय के साथ होने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उनके इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति और भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
महबूबा मुफ्ती के बयान पर साधा निशाना
पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने देश में “बौद्धिक अराजकता” फैलाने को गैर-लोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार या व्यवस्था का विरोध करने का अधिकार है।
हालांकि, उनके मुताबिक अभिव्यक्ति और विरोध की आजादी का इस्तेमाल संवैधानिक, नैतिक और आध्यात्मिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकार का इस्तेमाल देश के विनाश या समाज में अराजकता पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
‘बचपन को आंदोलन का जरिया न बनाएं’
रामदेव ने अपने बयान में बच्चों और युवाओं पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश का बचपन सुरक्षित रहेगा तो भारत का भविष्य मजबूत होगा। उनके मुताबिक, बच्चों को राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों का माध्यम बनाने के बजाय उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत में जाति और धर्म के नाम पर खतरे की राजनीति करने के बजाय देश के युवाओं के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा होनी चाहिए। शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना देश के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।
रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन विरोध का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध के बजाय देशहित से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर आंदोलन किए जाने चाहिए।