बिहार में रोजाना 49.1 पेटाबाइट इंटरनेट डेटा की खपत हो रही है. महाराष्ट्र 48.7 पेटाबाइट के साथ दूसरे और यूपी ईस्ट 42.31 पेटाबाइट के साथ तीसरे स्थान पर है. देश में सबसे ज्यादा डेटा यूट्यूब पर खर्च हो रहा है.
Knews Desk- भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. स्मार्टफोन पर वीडियो देखने, रील्स स्क्रॉल करने और सोशल मीडिया चलाने में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा समय बिता रहे हैं. इसका असर मोबाइल डेटा की खपत पर भी साफ दिखाई दे रहा है. सर्किलवार आंकड़ों के मुताबिक, बिहार रोजाना इंटरनेट डेटा इस्तेमाल करने के मामले में देश में सबसे आगे है. खास बात यह है कि टेली-डेंसिटी यानी आबादी के मुकाबले फोन कनेक्शन के मामले में बिहार सबसे पीछे है, लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग जमकर डेटा खर्च कर रहे हैं.
दूरसंचार क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में रोजाना करीब 49.1 पेटाबाइट डेटा इस्तेमाल हो रहा है. यह लगभग 5.14 करोड़ जीबी के बराबर है. डेटा खपत के मामले में महाराष्ट्र 48.7 पेटाबाइट के साथ दूसरे स्थान पर है. वहीं, उत्तर प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र 42.31 पेटाबाइट डेटा के साथ तीसरे नंबर पर है.
इस सूची में गुजरात 42.2 पेटाबाइट और मध्य प्रदेश 41.3 पेटाबाइट डेटा खपत के साथ क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. आंकड़े बताते हैं कि इंटरनेट की पहुंच वाले क्षेत्रों में ऑनलाइन वीडियो और सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है.
यूट्यूब पर सबसे ज्यादा खर्च हो रहा मोबाइल डेटा
भारतीय इंटरनेट यूजर्स के बीच वीडियो देखने का चलन तेजी से बढ़ा है. कुल डेटा खपत में यूट्यूब की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत है. यानी मोबाइल इंटरनेट पर खर्च होने वाले डेटा का करीब एक चौथाई हिस्सा यूट्यूब वीडियो देखने में इस्तेमाल हो रहा है.
इंस्टाग्राम 21.7 प्रतिशत डेटा खपत के साथ दूसरे नंबर पर है. फेसबुक की हिस्सेदारी 17.5 प्रतिशत है. इसके अलावा गूगल सर्च और दूसरी ऑनलाइन गतिविधियों में 5.2 प्रतिशत, जबकि वॉट्सऐप पर 3.5 प्रतिशत डेटा खर्च हो रहा है.
मोबाइल डेटा की बढ़ती खपत के पीछे कई वजहें हैं. इनमें वीडियो स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया सबसे प्रमुख हैं.
- यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखने से बड़ी मात्रा में डेटा खर्च होता है.
- इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स देखने के दौरान लगातार इंटरनेट डेटा इस्तेमाल होता रहता है.
- बड़ी फाइलें डाउनलोड करने और ऐप्स के ऑटो-अपडेट से भी डेटा तेजी से खत्म होता है.
हर महीने 37 जीबी डेटा इस्तेमाल कर रहा भारतीय
एरिक्सन की जून 2026 की मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक स्मार्टफोन यूजर औसतन हर महीने 37 जीबी मोबाइल डेटा खर्च कर रहा है. अनुमान है कि अगले पांच साल में यह खपत बढ़कर 70 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकती है.
रिपोर्ट में सस्ते 5G स्मार्टफोन, बेहतर नेटवर्क कवरेज और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सेवाओं को डेटा इस्तेमाल बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है. अनुमान के मुताबिक, 2031 तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन की संख्या 110 करोड़ से ज्यादा हो सकती है. यह कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का करीब 81 प्रतिशत होगा.
2025 के अंत तक देश में 5G सब्सक्रिप्शन की संख्या करीब 43 करोड़ थी, जबकि 4G सब्सक्राइबरों की संख्या लगभग 57 करोड़ थी. आने वाले वर्षों में 5G के बढ़ते इस्तेमाल के साथ 4G कनेक्शन की संख्या में कमी आने का अनुमान है.
ब्रॉडबैंड और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के आंकड़े
ट्राई के जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या 1094.48 मिलियन तक पहुंच गई. 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सब्सक्राइबरों की संख्या भी जून के 12.94 मिलियन से बढ़कर जुलाई में 13.21 मिलियन हो गई.
इसी दौरान करीब 15.98 मिलियन लोगों ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी MNP के लिए आवेदन किया. इससे पता चलता है कि मोबाइल यूजर्स बेहतर नेटवर्क और डेटा सेवाओं के लिए अपने सर्विस प्रोवाइडर बदल रहे हैं.
कुल मिलाकर, भारत में इंटरनेट अब केवल बातचीत या जानकारी हासिल करने का माध्यम नहीं रह गया है. वीडियो स्ट्रीमिंग, रील्स और सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता ने डेटा खपत को नई रफ्तार दी है. 5G नेटवर्क के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में इंटरनेट इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है.