KNEWS DESK- पुराने समय में राखी का डिजाइन बेहद सादा हुआ करता था। रंगीन या रेशम के धागों के साथ बीच में गोलाकार सजावटी हिस्सा लगाया जाता था। इसमें मोती, चमकीले रेशे और पारंपरिक सजावट का इस्तेमाल होता था। कई राखियां इतनी बड़ी होती थीं कि भाई की पूरी कलाई ढक जाती थी। इन पर ‘मेरा भैया’ जैसे संदेश भी लिखे होते थे। उस दौर में राखी की खूबसूरती उसकी सादगी और पारंपरिक अंदाज में होती थी।

समय के साथ बच्चों के लिए राखियों में भी काफी बदलाव आया। भगवान गणेश की आकृति वाली राखियों के अलावा कार्टून कैरेक्टर और खिलौनों वाली राखियां बाजार में आईं। कुछ राखियों में बटन दबाने पर लाइट जलती थी। बच्चों को आकर्षित करने के लिए मोर पंख, रंगीन मोती, स्टोन और अलग-अलग मोटिफ्स का इस्तेमाल किया जाने लगा।

इसके बाद राखी में चंदन जैसे प्राकृतिक और खुशबूदार तत्वों का चलन बढ़ा। चंदन की खुशबू वाली राखियों में मोती और सजावटी धागों के साथ चंदन के छोटे एलिमेंट्स लगाए जाते थे। इससे पारंपरिक राखी को एक अलग और रॉयल लुक मिला। इस दौर में राखी के डिजाइन में ज्वैलरी जैसी सजावट का इस्तेमाल भी बढ़ने लगा।

फिर आया मिनिमल और स्लीक डिजाइन का दौर। बड़ी और भारी राखियों की जगह हल्की, पतली और स्टाइलिश राखियां पसंद की जाने लगीं। इनमें रंगीन मोती, गोल्डन डिटेलिंग और मोर जैसे आकर्षक डिजाइन देखने को मिलते हैं। इन्हें पहनना आसान होने के साथ-साथ रोजाना इस्तेमाल में भी सुविधाजनक माना जाता है।

बाजार में भाई-भाभी के लिए कॉम्बो राखियों का ट्रेंड भी देखने को मिला। भाई के लिए राखी और भाभी के लिए चूड़ी या कंगन में लगाने वाली राखी को एक जैसे डिजाइन में तैयार किया जाने लगा। इनमें पेंडेंट, स्टोन और मोतियों से गोल्डन फिनिश दी जाती है।

आज के दौर में ज्वैलरी वाली राखियां सबसे आकर्षक विकल्पों में शामिल हैं। चेन, चमकदार स्टोन और खूबसूरत पेंडेंट वाली राखियां अब सिर्फ रक्षाबंधन का धागा नहीं रहीं, बल्कि एक फैशन स्टेटमेंट और गिफ्ट का रूप ले चुकी हैं। यानी बदलते फैशन के साथ राखी ने भी सादगी से प्रीमियम स्टाइल तक का लंबा सफर तय किया है।