Knews Desk- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का 56वां जन्मदिन इस बार राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहा। दिल्ली स्थित 24, अकबर रोड पर आयोजित कार्यक्रम में जब राहुल गांधी केक काट रहे थे, उस दौरान समर्थकों ने ‘राहुल गांधी को PM बनाओ’ के नारे लगाए। इस मौके पर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर यह सवाल गहराने लगा कि क्या राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
जन्मदिन से एक दिन पहले राहुल गांधी ने यह दावा भी किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साल के भीतर पद छोड़ देंगे। इस बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। वहीं कांग्रेस और INDIA गठबंधन के भीतर राहुल गांधी की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है। गठबंधन में जो नेता कभी नेतृत्व को चुनौती देते थे, वे अब कमजोर या हाशिये पर दिखाई दे रहे हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी ने हाल के वर्षों में युवाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़ने की रणनीति पर काम किया है। NEET, CBSE, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने Gen-Z और युवा वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजबूत जनाधार और राजनीतिक करिश्मा अभी भी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
INDIA गठबंधन की स्थिति की बात करें तो कई क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक ताकत में उतार-चढ़ाव देखा गया है। शरद पवार की पकड़ पहले की तुलना में कमजोर हुई है, जबकि ममता बनर्जी चुनावी चुनौतियों से जूझ रही हैं। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव भी राजनीतिक और कानूनी परिस्थितियों के चलते सीमित प्रभाव में हैं। वहीं अखिलेश यादव और कुछ अन्य नेता राहुल गांधी के साथ सहयोगात्मक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
दूसरी ओर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राहुल गांधी को पीएम फेस के रूप में समर्थन देने की बात पहले भी कही है। इसके अलावा कुछ अन्य क्षेत्रीय नेता भी राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारते दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता से सीधा जुड़ाव बनाना और मोदी सरकार के मजबूत जनसंपर्क मॉडल को टक्कर देना है। इसके साथ ही संस्थाओं के प्रति विश्वास कायम करना भी उनकी राजनीतिक राह का अहम हिस्सा होगा।
फिलहाल, राहुल गांधी गांधीवादी और समावेशी राजनीति के रास्ते पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं, लेकिन 2029 की राह आसान नहीं मानी जा रही। राजनीति की यह जंग आने वाले वर्षों में और दिलचस्प होने की संभावना है।