पुरी जगन्नाथ मंदिर का अनसुलझा रहस्य, 12 साल में बदलती मूर्तियों के साथ किया जाता है ‘ब्रह्म पदार्थ’ का स्थानांतरण

Knews Desk- ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर को हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। हर साल आषाढ़ महीने में निकलने वाली भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं सदियों से लोगों को आकर्षित करती रही हैं। इन्हीं में से एक है भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर मौजूद बताए जाने वाले रहस्यमयी ‘ब्रह्म पदार्थ’ का रहस्य।

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियों के अंदर एक दिव्य तत्व मौजूद है, जिसे ‘ब्रह्म पदार्थ’ कहा जाता है। कहा जाता है कि इसे छूने का अवसर केवल कुछ विशेष पुजारियों को ही मिलता है और इस प्रक्रिया के दौरान बेहद गोपनीय नियमों का पालन किया जाता है। हालांकि, इस पदार्थ की वास्तविकता को लेकर आज तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

12 साल में एक बार होती है खास परंपरा ‘नवकलेवर’

भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर 12 से 19 साल के बीच एक विशेष धार्मिक प्रक्रिया आयोजित की जाती है, जिसे ‘नवकलेवर’ कहा जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पुरानी लकड़ी की मूर्तियों की जगह नई मूर्तियां स्थापित की जाती हैं।

इस प्रक्रिया में पुरानी मूर्तियों के अंदर मौजूद माने जाने वाले ‘ब्रह्म पदार्थ’ को निकालकर नई मूर्तियों में स्थापित किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय रखी जाती है और इसमें केवल चुनिंदा दैतापति पुजारियों को ही शामिल होने की अनुमति होती है।

अंधेरे में पूरी होती है रहस्यमयी प्रक्रिया

मान्यताओं के अनुसार, नवकलेवर की रात मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्था की जाती है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी रहती है और बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। कहा जाता है कि इस अनुष्ठान को करने वाले पुजारियों की आंखों पर कपड़ा बांधा जाता है और हाथों में दस्ताने पहनाए जाते हैं।

ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इस पवित्र प्रक्रिया की गोपनीयता बनी रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान ब्रह्म पदार्थ को सीधे देखना या छूना वर्जित माना जाता है।

पुजारियों के अनुभव से जुड़ी हैं कई मान्यताएं

कई कथाओं में दावा किया जाता है कि जब पुजारी इस रहस्यमयी तत्व को एक मूर्ति से दूसरी मूर्ति में स्थानांतरित करते हैं, तो उन्हें उसमें किसी जीवित वस्तु जैसी अनुभूति होती है। कुछ मान्यताओं में इसे धड़कते हुए हृदय जैसा बताया गया है।

हालांकि, इन दावों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। यह अनुभव पूरी तरह धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।

क्या है ‘ब्रह्म पदार्थ’? आज भी बना हुआ है रहस्य

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में मौजूद बताए जाने वाले इस ब्रह्म पदार्थ को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। कुछ श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा कोई दिव्य अवशेष है। वहीं कुछ लोग इसे किसी दुर्लभ धातु या रहस्यमयी वस्तु से जोड़ते हैं।

लेकिन इसकी वास्तविक पहचान आज भी रहस्य बनी हुई है। मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के कारण इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

पुरी जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य सदियों से लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। यही कारण है कि जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी कथाओं के कारण दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र है।

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