KNEWS DESK- मानसून में कार चलाते समय सिर्फ वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट का सही होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि टायरों की स्थिति और उनका सही एयर प्रेशर भी बेहद अहम है। गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर होने से कार के फिसलने और नियंत्रण बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में कई कार मालिकों के मन में सवाल रहता है कि बारिश के मौसम में टायरों में नॉर्मल हवा भरवानी चाहिए या नाइट्रोजन?

दरअसल, दोनों विकल्पों के अपने फायदे हैं। नाइट्रोजन से टायर प्रेशर में बदलाव कुछ हद तक धीमा हो सकता है, लेकिन सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज सही टायर प्रेशर, पर्याप्त ट्रेड डेप्थ और टायरों की अच्छी कंडीशन है।
बारिश में क्यों जरूरी है सही टायर प्रेशर?
मानसून में सड़क पर पानी और कीचड़ होने के कारण टायर और सड़क के बीच संपर्क प्रभावित हो सकता है। अगर टायर का प्रेशर कार निर्माता द्वारा बताए गए स्तर से कम या ज्यादा है तो हैंडलिंग, ब्रेकिंग और टायर के घिसने पर असर पड़ सकता है। इसलिए बारिश में समय-समय पर टायर प्रेशर चेक करना जरूरी है। सही प्रेशर कितना होना चाहिए, इसकी जानकारी आमतौर पर कार के ड्राइवर-साइड डोर फ्रेम, फ्यूल लिड या ओनर मैनुअल में दी होती है।
टायरों में नाइट्रोजन भरवाने का एक फायदा यह है कि कमर्शियल टायर नाइट्रोजन आमतौर पर सूखी होती है। इससे टायर के अंदर नमी कम रहती है। नाइट्रोजन के अणु ऑक्सीजन की तुलना में रबर से थोड़ी धीमी गति से बाहर निकलते हैं, इसलिए समय के साथ प्रेशर लॉस कुछ कम हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि नाइट्रोजन भरवाने के बाद टायर प्रेशर चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नाइट्रोजन वाले टायरों का प्रेशर भी नियमित रूप से जांचना चाहिए।
नॉर्मल कंप्रेस्ड एयर भी रोजमर्रा की कार ड्राइविंग के लिए पूरी तरह व्यावहारिक विकल्प है। सामान्य हवा में पहले से करीब 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी उपलब्धता है। पेट्रोल पंप से लेकर टायर और पंक्चर की दुकानों तक यह आसानी से मिल जाती है। अगर कार के सभी टायर सही प्रेशर पर हैं तो केवल नाइट्रोजन न होने के कारण कार को असुरक्षित नहीं माना जा सकता।
क्या नाइट्रोजन से बारिश में बढ़ जाती है ग्रिप?
यह समझना जरूरी है कि सिर्फ नाइट्रोजन भरवाने से गीली सड़क पर टायर की ग्रिप अपने आप बेहतर नहीं हो जाती। ग्रिप पर टायर का ट्रेड, रबर कंपाउंड, टायर की उम्र, सड़क की स्थिति और सही एयर प्रेशर जैसे कारकों का ज्यादा सीधा प्रभाव पड़ता है। बारिश में अगर टायर बहुत ज्यादा घिस चुके हैं तो नाइट्रोजन भरवाने के बावजूद उनका प्रदर्शन खराब हो सकता है। इसलिए मानसून से पहले टायर के ट्रेड और किसी कट, क्रैक या असामान्य घिसाव की जांच करवाना बेहतर है।
नाइट्रोजन या नॉर्मल हवा, बारिश में क्या चुनें?
अगर आपके आसपास नाइट्रोजन आसानी से उपलब्ध है तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर अगर आप प्रेशर लॉस को कुछ हद तक कम रखना चाहते हैं। लेकिन सामान्य ड्राइविंग के लिए नॉर्मल हवा भी पर्याप्त है, बशर्ते टायर प्रेशर नियमित रूप से चेक किया जाए। सबसे जरूरी बात यह है कि टायरों में कार निर्माता द्वारा सुझाया गया प्रेशर बना रहे। सिर्फ नाइट्रोजन को बारिश में सुरक्षित ड्राइविंग की गारंटी मानना सही नहीं होगा।
मानसून में टायरों का ऐसे रखें ख्याल
बारिश के दिनों में लॉन्ग ड्राइव पर निकलने से पहले टायर प्रेशर जरूर जांचें। टायर बहुत ज्यादा घिस चुके हों तो उन्हें बदलवाने पर विचार करें। स्पेयर टायर का प्रेशर भी चेक करें और गीली सड़क पर तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक लगाने और पानी भरे हिस्सों से तेज गति में गुजरने से बचें। नाइट्रोजन के कुछ व्यावहारिक फायदे जरूर हैं, लेकिन मानसून में कार की सुरक्षा का असली आधार सही टायर प्रेशर और अच्छी टायर कंडीशन है। नॉर्मल हवा हो या नाइट्रोजन, नियमित जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।