Knews Desk: कजरी तीज का पावन पर्व आज यानी 31 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है। यह व्रत खास तौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कई जगहों पर नीम की डाली यानी नीमड़ी माता की पूजा भी की जाती है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।कई बार अनजाने में कुछ खाने-पीने या किसी अन्य वजह से व्रत टूट जाता है। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं को चिंता होने लगती है कि क्या इससे व्रत का फल समाप्त हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर व्रत गलती या अनजाने में टूट गया है तो घबराने के बजाय भगवान शिव और माता पार्वती से सच्चे मन से क्षमा मांगनी चाहिए। श्रद्धा और भावना को पूजा में महत्वपूर्ण माना गया है।
भगवान शिव और माता पार्वती से मांगें क्षमा
अगर कजरी तीज का व्रत अनजाने में टूट जाए तो सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ जोड़कर अपनी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें। मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें। धार्मिक मान्यताओं में सच्ची निष्ठा और भाव से की गई प्रार्थना का विशेष महत्व बताया गया है।
करें शुद्धिकरण
व्रत टूटने के बाद हाथ में गंगाजल लेकर आचमन किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा को आगे बढ़ाएं। माना जाता है कि पूजा के दौरान मन की शुद्धता और भगवान के प्रति श्रद्धा महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में इसके नियम अलग हो सकते हैं।
दोबारा करें शिव-पार्वती की पूजा
व्रत टूटने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा दोबारा श्रद्धा के साथ की जा सकती है। पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करने के बाद फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती और मंत्रों का जाप किया जा सकता है। पूजा के दौरान अपनी गलती के लिए क्षमा मांगना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
दान-पुण्य भी कर सकते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या आवश्यक वस्तुएं दान की जा सकती हैं। इसके अलावा मंदिर में सुहाग की सामग्री अर्पित करने की भी परंपरा है। इसका उद्देश्य श्रद्धा के साथ भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करना है।
कब मनाई जा रही है कजरी तीज?
इस साल तृतीया तिथि 30 अगस्त 2026 को सुबह 9:36 बजे शुरू हुई और 31 अगस्त को सुबह 8:50 बजे समाप्त हुई। उदया तिथि के अनुसार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जा रहा है। चंद्रोदय का समय रात करीब 8:25 से 8:27 बजे के बीच बताया गया है। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।नोट: ये उपाय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कजरी तीज के नियम और पूजा-विधि अलग हो सकती है।