KNEWS DESK- हिंदू पंचांग का तीसरा महीना, ज्येष्ठ माह, जहां एक ओर तेज गर्मी के लिए प्रसिद्ध है, वहीं धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य भी कई गुना फल देते हैं। सही विधि से पूजा-पाठ और दान करने पर भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ज्येष्ठ माह 2026 कब से शुरू होगा?
ज्येष्ठ माह की शुरुआत ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा से होती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 1 मई की रात 10:52 बजे से प्रारंभ होकर 3 मई दोपहर 12:49 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, ज्येष्ठ माह का आरंभ 2 मई 2026, शनिवार से माना जाएगा।
शुभ योग और नक्षत्र का विशेष संयोग
ज्येष्ठ माह के पहले दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस दिन को और भी खास बनाते हैं:
- व्यतिपात योग: सुबह से रात 9:45 बजे तक
- इसके बाद वरीयान योग का आरंभ
- पूरे दिन विशाखा नक्षत्र का प्रभाव
- चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य मेष राशि में स्थित रहेंगे
इसके अलावा, 3 मई को रात 12:49 बजे से सुबह 5:39 बजे तक त्रिपुष्कर योग का भी विशेष संयोग बनेगा। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा 29 जून 2026 को होगी, इसी दिन इस माह का समापन माना जाएगा।
ज्येष्ठ माह का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ माह में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए जल और छाया का महत्व बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय स्नान, दान, जप और तप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस माह में किया गया छोटा-सा भी शुभ कार्य जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
ज्येष्ठ माह के सरल और प्रभावी उपाय
इस माह का सबसे महत्वपूर्ण और आसान उपाय है जल दान। इसे करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है।
आप ये छोटे-छोटे उपाय अपना सकते हैं:
- प्यासे लोगों को ठंडा पानी पिलाएं।
- घर के बाहर मिट्टी के घड़े में पानी रखें।
- पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करें।
क्या मिलेगा इन उपायों का फल?
मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में जल दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
ज्येष्ठ माह केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का भी अवसर है। इस दौरान किए गए छोटे प्रयास भी आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।