Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर घर ला रहे हैं लड्डू गोपाल? मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

KNEWS DESK- भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस साल 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा. जन्माष्टमी के आते ही बाजारों में लड्डू गोपाल की मूर्तियों, पोशाक, मुकुट, बांसुरी, झूले और श्रृंगार की चीजों की मांग बढ़ जाती है. बहुत से भक्त इस दिन नई प्रतिमा खरीदकर घर के मंदिर में स्थापित करते हैं. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लड्डू गोपाल की मूर्ति खरीदते और घर लाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

कैसी धातु की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है?

लड्डू गोपाल की मूर्ति खरीदते समय धातु का चुनाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीतल, अष्टधातु या चांदी से बनी प्रतिमा घर के लिए शुभ मानी जाती है. भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार इनमें से किसी धातु की मूर्ति का चयन कर सकते हैं.

मूर्ति का आकार भी रखें ध्यान

घर के मंदिर के लिए बहुत बड़ी प्रतिमा के बजाय छोटे आकार की लड्डू गोपाल की मूर्ति रखने की परंपरा अधिक प्रचलित है. नंबर 1, 2, 3 या 4 जैसी छोटी प्रतिमाओं की सेवा, स्नान और श्रृंगार करना भी आसान रहता है. हालांकि, मूर्ति का आकार चुनते समय घर के मंदिर में उपलब्ध स्थान और आपकी नियमित पूजा की सुविधा का ध्यान रखना भी जरूरी है.

लड्डू गोपाल का स्वरूप कैसा हो?

मूर्ति खरीदते समय लड्डू गोपाल के बाल स्वरूप और चेहरे के भाव पर ध्यान दें. ऐसी प्रतिमा चुनने की मान्यता है, जिसमें भगवान का स्वरूप आकर्षक, शांत और मुस्कुराता हुआ हो. प्रतिमा को ध्यान से देखकर ही खरीदना चाहिए.

खंडित प्रतिमा घर न लाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार टूटी या खंडित मूर्ति को घर के मंदिर में स्थापित नहीं करना चाहिए. इसलिए लड्डू गोपाल खरीदते समय प्रतिमा को अच्छी तरह जांच लें कि उसमें कहीं दरार, टूट-फूट या कोई क्षति तो नहीं है. इसी तरह मूर्ति के स्वरूप और रंग को लेकर भी अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यता का ध्यान रखना चाहिए.

घर लाने के बाद कैसे करें स्थापना?

लड्डू गोपाल को घर लाने के बाद उनकी स्थापना से पहले विधि-विधान से स्नान और श्रृंगार करने की परंपरा है.

पंचामृत से कराएं स्नान

घर लाने के बाद लड्डू गोपाल को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत से स्नान कराया जाता है. इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर उन्हें साफ कपड़े से पोंछकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं.

पीले वस्त्र और श्रृंगार

स्नान के बाद लड्डू गोपाल को स्वच्छ वस्त्र, विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनाने की परंपरा है. इसके बाद उनका मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और वैजयंती माला आदि से श्रृंगार किया जा सकता है. श्रृंगार करते समय यह ध्यान रखें कि इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्री साफ और उचित हो.

जन्माष्टमी पर करें विशेष पूजा

जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को सजाकर उनके लिए झूला तैयार किया जाता है. रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा, आरती और भोग लगाने की परंपरा है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार माखन-मिश्री, पंचामृत और अन्य प्रसाद अर्पित कर सकते हैं.

मूर्ति, धातु, रंग, स्थापना और पूजा से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में अलग हो सकते हैं. इसलिए इन्हें धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखें, निश्चित फल या नुकसान की गारंटी के रूप में नहीं.