20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। लेकिन क्या रावण दहन के बाद बची राख को घर लाना शुभ माना जाता है या अशुभ? इसको लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यताओं के अनुसार, रावण दहन की राख को घर में संभालकर रखना उचित नहीं माना जाता है।
Knews Desk – रावण को अधर्म, अहंकार और बुराई का प्रतीक माना जाता है। दशहरे पर उसके पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। कुछ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रावण दहन के बाद बची राख को नकारात्मकता और विनाश से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से कई विद्वान और ज्योतिषी इसे घर में लाकर रखने से बचने की सलाह देते हैं। हालांकि, राख रखने से घर में अशांति या दुर्भाग्य आने के दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
कुछ विशेष तांत्रिक परंपराओं और अनुष्ठानों में इस राख के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। हालांकि, ऐसी मान्यताएं सामान्य गृहस्थ जीवन से अलग हैं। आम लोगों को किसी भी धार्मिक या तांत्रिक प्रयोग को बिना उचित जानकारी के अपनाने से बचना चाहिए।
अगर अनजाने में रावण दहन की राख घर आ गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसे सावधानी से इकट्ठा करके स्थानीय कचरा निपटान के नियमों के अनुसार हटाया जा सकता है। राख को खुले में उड़ने देने या ऐसी जगह डालने से बचें, जहां बच्चे, जानवर या दूसरे लोग उसके संपर्क में आ सकते हैं।
रावण के पुतले को बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री के आधार पर राख में रंग, रासायनिक पदार्थ या अन्य अवशेष हो सकते हैं। इसलिए इसे नंगे हाथों से छूने, सांस के साथ अंदर लेने या जल स्रोतों में डालने से बचना बेहतर है। राख को मिट्टी में दबाने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसमें कोई हानिकारक सामग्री न हो और स्थानीय पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन न हो।
दशहरे का मुख्य संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत और अहंकार के अंत का है। इसलिए इस पर्व को सकारात्मकता, संयम और सद्भाव के साथ मनाएं। रावण दहन की राख को लेकर प्रचलित धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जा सकता है, लेकिन उसे घर में रखने से अनिवार्य रूप से दुर्भाग्य आने की बात को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।