KNEWS DESK- भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चौथ का पर्व मनाया जाता है। इसे बहुला चतुर्थी, भादवा चौथ और भादुड़ी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर पर महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि, उनकी लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश के साथ श्रीकृष्ण और बहुला गौमाता की पूजा करने की परंपरा है।
बहुला चौथ के व्रत में पूजा के साथ व्रत कथा का श्रवण भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला गौमाता की कथा सत्य, त्याग और वचन निभाने का संदेश देती है। वहीं गणेश जी की पूजा से विघ्न-बाधाएं दूर होने और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।
बहुला चौथ 2026 का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष बहुला चौथ का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जा रहा है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 31 अगस्त 2026, सुबह 8:50 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 1 सितंबर 2026, सुबह 7:41 बजे
- पूजा का शुभ समय: शाम 5:38 बजे से रात 8:10 बजे तक
- चंद्रोदय: रात करीब 8:28 बजे
चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।
बहुला चौथ की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, बहुला चौथ की कथा भगवान श्रीकृष्ण और बहुला नाम की गाय से जुड़ी है। कहा जाता है कि स्वर्ग की कामधेनु ने नंद बाबा की गौशाला में बहुला गाय के रूप में जन्म लिया था। भगवान श्रीकृष्ण को बहुला से विशेष स्नेह था। एक दिन श्रीकृष्ण ने बहुला की सत्यनिष्ठा और वचन के प्रति उसकी निष्ठा की परीक्षा लेने का विचार किया। वह जंगल में चर रही थी। तभी श्रीकृष्ण ने एक भूखे सिंह का रूप धारण कर उसका रास्ता रोक लिया। सिंह को सामने देखकर बहुला डर गई, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया। उसने सिंह से कहा कि उसका बछड़ा घर पर भूखा है। वह पहले उसे दूध पिलाकर वापस लौट आएगी। बहुला ने सिंह को भरोसा दिलाया कि वह अपना वचन हर हाल में पूरा करेगी। सिंह ने उसकी बात मानकर उसे घर जाने दिया। बहुला अपने बछड़े के पास पहुंची, उसे दूध पिलाया और फिर मां होने के बावजूद अपने वचन को निभाने के लिए दोबारा जंगल लौट आई। जब सिंह ने बहुला को वचन निभाते हुए वापस आते देखा तो वह उसकी सत्यनिष्ठा से प्रसन्न हुआ। तभी श्रीकृष्ण अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और बहुला को आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने बहुला की सत्य और धर्म के प्रति निष्ठा से प्रसन्न होकर इस दिन व्रत और पूजा करने वाली महिलाओं को संतान सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद दिया।
भादवा चौथ से जुड़ी दूसरी कथा
भादवा चौथ की एक अन्य प्रचलित कथा साहूकार के बेटे और उसकी पत्नी से जुड़ी है। कथा के अनुसार, साहूकार की बहू ने चौथ माता और विनायक जी के व्रत का महत्व जानने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत रखना शुरू किया। कुछ समय बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी और उसका पति धन कमाने के लिए परदेश चला गया। पति के दूर रहने के बावजूद महिला ने अपनी आस्था नहीं छोड़ी और नियमित रूप से चौथ माता तथा गणेश जी की पूजा करती रही। कहा जाता है कि करीब 12 वर्षों तक दोनों अलग रहे। इस दौरान साहूकार के बेटे को परदेश में व्यापार से काफी लाभ हुआ और वह धन लेकर घर लौटने लगा। रास्ते में उसका सामना नागराज से हुआ, जिससे उसकी जान पर संकट आ गया। कथा के अनुसार, पत्नी की वर्षों की श्रद्धा और व्रत के फल से चौथ माता तथा विनायक जी की कृपा हुई और साहूकार का बेटा संकट से सुरक्षित निकलकर घर पहुंच गया। तभी से इस व्रत को संकटों से रक्षा करने वाला और गणेश जी की कृपा दिलाने वाला माना जाता है।
व्रत कथा सुनने का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहुला चौथ के दिन पूजा के बाद व्रत कथा सुनने से व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। बहुला गौमाता की कथा महिलाओं को सत्य, धर्म और दिए गए वचन को निभाने की प्रेरणा देती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी, श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा करने से परिवार पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। पूजा-व्रत की विधि और मुहूर्त अलग-अलग क्षेत्रों एवं पंचांगों के अनुसार बदल सकते हैं।