KNEWS DESK- सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले 119 दिनों तक सृष्टि के संचालन का कार्य सीमित कर विश्राम करते हैं। वर्ष 2026 में 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी, जिसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ होगा। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
क्या होता है चातुर्मास?
आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलने वाले चार माह के समय को चातुर्मास कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसलिए इस अवधि में सांसारिक सुखों की अपेक्षा भक्ति, संयम, दान और तपस्या पर अधिक जोर दिया जाता है।
चातुर्मास में क्यों नहीं होते शुभ कार्य?
मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के कारण इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। माना जाता है कि इन दिनों किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागने के बाद ही दोबारा विवाह और अन्य शुभ कार्य शुरू होते हैं।
चातुर्मास में भगवान विष्णु कहां रहते हैं?
लोकप्रिय पौराणिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु केवल क्षीरसागर में ही विश्राम नहीं करते, बल्कि दैत्यराज बलि के पाताल लोक में भी निवास करते हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि की दानशीलता और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वे हर वर्ष चार माह उनके लोक में निवास करेंगे।
इसी कारण चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु दैत्यराज बलि के महल में विश्राम करते हैं और देवउठनी एकादशी के दिन पुनः अपने धाम लौटते हैं।
वामन अवतार से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी, तब उन्होंने पूरे ब्रह्मांड को अपने तीन चरणों में नाप लिया। राजा बलि की भक्ति और वचनपालन से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का अधिपति बनाया और यह वरदान दिया कि वे प्रत्येक वर्ष चार महीने उनके साथ निवास करेंगे। इसी मान्यता के आधार पर चातुर्मास में भगवान विष्णु के पाताल लोक में रहने की कथा प्रचलित है।
चातुर्मास में क्या करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान—
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की नियमित पूजा करें।
- एकादशी व्रत, जप और ध्यान का पालन करें।
- दान-पुण्य और सेवा कार्यों में भाग लें।
- सात्विक भोजन और संयमित जीवनशैली अपनाएं।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और सत्संग करें।
कब होगा चातुर्मास का समापन?
वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगा। इसी दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है और इसके बाद विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य दोबारा प्रारंभ हो जाते हैं।