Bhado Month 2026: भादो में पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये काम, वरना नाराज हो सकते हैं भगवान

Knews Desk: हिंदू धर्म में भाद्रपद मास को बेहद पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भादो के नाम से भी प्रसिद्ध यह महीना पूजा-पाठ, व्रत, उपवास और साधना के लिए विशेष माना जाता है। साल 2026 में भाद्रपद मास की शुरुआत 29 अगस्त से हुई है और यह 26 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी और अनंत चतुर्दशी जैसे प्रमुख पर्व भी इसी महीने में आते हैं। ऐसे में पूजा-पाठ करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

भाद्रपद मास में पूजा करने से पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भगवान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर जल, फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान का ध्यान कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में शुद्धता और स्वच्छता का विशेष महत्व होता है।

पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को साफ और ताजा रखना चाहिए। भगवान को अर्पित करने के लिए बासी फूल, खराब फल या गंदी सामग्री का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पूजा के लिए रखे गए जल के पात्र को भी साफ रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि पूजा सामग्री की पवित्रता बनाए रखने से पूजा का महत्व बढ़ता है।पूजा के बाद भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद का भी सम्मान करना चाहिए। प्रसाद को इधर-उधर फेंकना या गंदे स्थान पर रखना उचित नहीं माना जाता। पूजा के बाद प्रसाद को श्रद्धा के साथ ग्रहण करना चाहिए। अगर प्रसाद अधिक हो तो उसे परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांट देना चाहिए।

भाद्रपद मास में खान-पान को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। पूजा-पाठ करने वाले लोगों को इस दौरान सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक परंपराओं में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसी तामसिक चीजों से दूर रहने की बात कही गई है। भगवान को भी सात्विक भोजन का ही भोग लगाने की परंपरा है।भगवान विष्णु और राधा-कृष्ण की पूजा में तुलसी पत्र का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, तुलसी के पत्ते तोड़ते समय भी कुछ नियमों का पालन करने की मान्यता है। रविवार, द्वादशी तिथि और शाम के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए तुलसी पत्र सुबह स्नान करने के बाद तोड़ना शुभ माना जाता है।

भाद्रपद मास में धार्मिक अनुष्ठानों और व्रत-त्योहारों की अधिकता रहती है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान की आराधना, दान-पुण्य और उपवास जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।हालांकि, यहां बताई गई बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा के नियमों में अंतर भी हो सकता है।

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