KNEWS DESK- हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार संतान की सुख-समृद्धि और उनकी लंबी उम्र की कामना से जुड़े हैं. इन्हीं में से एक है बहुला चौथ, जिसे बहुला चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन माताएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहुला चौथ पर भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और गौ माता-बछड़े की पूजा का विशेष महत्व होता है. कई स्थानों पर शाम के समय पूजा करने, बहुला चौथ की कथा सुनने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है.
बहुला चौथ 2026 कब मनाई जाएगी?
साल 2026 में बहुला चौथ का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को रखा जाएगा.
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 31 अगस्त, सुबह 8:52 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 1 सितंबर, सुबह 7:42 बजे
- पूजा का समय: शाम 6:43 बजे से रात 7:08 बजे तक
- चंद्रोदय: रात करीब 8:50 बजे
गौ माता और बछड़े की पूजा का क्या है महत्व?
बहुला चौथ पर गाय और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं में गौ माता को पूजनीय माना गया है और उनकी पूजा को शुभ फल देने वाला बताया जाता है. इस व्रत से जुड़ी मान्यता में गाय के दूध या दूध से बनी चीजों का सेवन न करने की परंपरा भी बताई जाती है. इसके पीछे बछड़े के अधिकार और उसके प्रति करुणा का भाव माना जाता है.
बहुला चौथ की पूजा के लिए क्या-क्या चाहिए?
अगर आप पहली बार यह व्रत कर रही हैं, तो पूजा की सामग्री पहले से तैयार कर लें.
पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
- भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर
- लड्डू गोपाल यानी श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर
- गौ माता और बछड़े की मूर्ति या तस्वीर
- चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- रोली और चंदन
- अक्षत यानी साबुत चावल
- कलावा
- दूर्वा घास
- तुलसी दल
- धूप और कपूर
- देसी घी का दीपक
- जल से भरा लोटा
- फल और मिठाई
- पूजा के लिए फूल
- गाय के लिए हरा चारा
अगर घर में गाय-बछड़े की मूर्ति या तस्वीर उपलब्ध न हो, तो कुछ स्थानों पर मिट्टी से गाय और बछड़े की आकृति बनाने की भी परंपरा है.
घर पर ऐसे करें बहुला चौथ की पूजा
सुबह स्नान से करें दिन की शुरुआत
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें.
पूजा स्थल तैयार करें
घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर चौकी रखें. चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश, लड्डू गोपाल तथा गौ माता-बछड़े की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
दीपक जलाकर पूजा शुरू करें
सबसे पहले धूप और देसी घी का दीपक जलाएं. इसके बाद पूजा में रखी प्रतिमाओं का जल से शुद्धिकरण करें.
तिलक और पूजन सामग्री अर्पित करें
गणेश जी, श्रीकृष्ण और गौ माता-बछड़े को चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें. कलावा चढ़ाएं. भगवान गणेश को दूर्वा और श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करें.
भोग लगाएं और कथा सुनें
फल और सात्विक मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद बहुला चौथ की कथा पढ़ें या सुनें. कथा समाप्त होने पर फूल या अक्षत भगवान को अर्पित करें.
आरती करें
पूजा के अंत में भगवान गणेश और श्रीकृष्ण की आरती करें. संभव हो तो गौ माता और बछड़े को हरा चारा या आटे की लोई खिलाएं.
चंद्रमा को दें अर्घ्य
रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें जल अर्पित करें. इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें.
बहुला चौथ के व्रत में क्या खाएं?
बहुला चौथ के व्रत में कई स्थानों पर अनाज का सेवन नहीं किया जाता. व्रती दिनभर उपवास रखती हैं और पूजा के बाद फलाहार करने की परंपरा है. व्रत के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं. बहुला चौथ की पूजा, व्रत और पारण से जुड़े नियम अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ भिन्न हो सकते हैं. ऊपर दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है. व्रत रखने से पहले अपनी स्थानीय परंपरा या परिवार के नियमों का ध्यान रखें.