KNEWS DESK- आषाढ़ पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, जप-तप और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। यही तिथि गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाई जाती है, जब गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
साल 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना, जल अर्पित करना और परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर पीपल की पूजा का महत्व
सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को देववृक्ष कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु का निवास होता है। यही कारण है कि पीपल की पूजा को विष्णु आराधना के समान फलदायी माना जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन श्रद्धापूर्वक पीपल की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पीपल की पूजा करने से क्या मिलते हैं शुभ फल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा पर पीपल की पूजा करने से कई प्रकार के शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- आर्थिक परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है।
- परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी इस दिन पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर कैसे करें पीपल की पूजा?
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। फिर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को दान देना भी शुभ माना जाता है।
पीपल के नीचे दीपक जलाने की धार्मिक मान्यता
आषाढ़ पूर्णिमा की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि दीपक का प्रकाश नकारात्मकता को दूर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक जलाने से उनकी कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
पीपल की परिक्रमा क्यों की जाती है?
हिंदू धर्म में पीपल की परिक्रमा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पीपल की परिक्रमा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। कई श्रद्धालु परिक्रमा करते समय विष्णु मंत्र या भगवान का नाम जपते हैं। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर दान-पुण्य का महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य का भी पर्व माना जाता है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र, अनाज या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।