KNEWS DESK- हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। खासकर आषाढ़ मास की अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए तर्पण, पिंडदान और दान से पितरों की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं।
यदि परिवार में लगातार परेशानियां बनी रहती हैं या ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष की स्थिति मानी जाती है, तो आषाढ़ अमावस्या के दिन कुछ धार्मिक उपाय करना लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं आषाढ़ अमावस्या 2026 की तिथि, इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य और किन बातों से बचना चाहिए।
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।
आषाढ़ अमावस्या पर करें ये शुभ उपाय
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर तर्पण करना अधिक शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, छाता या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यदायी माना गया है। इससे पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें। कई स्थानों पर पीपल की परिक्रमा करने की भी परंपरा है।
गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।
आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
- जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें।
- पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं।
- भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण करें।
- सात्विक भोजन करें और धार्मिक कार्यों में समय दें।
आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या नहीं करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। झूठ बोलने, क्रोध करने, किसी का अपमान करने या घर में विवाद करने से बचना चाहिए। इसके अलावा बिना कारण पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाना या किसी जीव-जंतु को कष्ट देना भी अशुभ माना जाता है। दान और धार्मिक कार्य केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से करने चाहिए।
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में अमावस्या को पितरों के स्मरण और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित तिथि माना गया है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और उन्नति बनी रहती है। वहीं श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करते हैं और परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। पितृ दोष और उससे जुड़े उपाय धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन पर आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय है।