KNEWS DESK- अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी पर्व है, जिसे इस वर्ष 19 अप्रैल, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आने वाला यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। यह पर्व न केवल भौतिक समृद्धि, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहे। खासतौर पर जो लोग पहली बार यह व्रत रखते हैं, उनके लिए यह दिन जीवन में नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।
अक्षय तृतीया व्रत की सही विधि और क्या करें
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और शुद्ध रहें
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पीले रंग के कपड़े पहनना विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को प्रिय है।
पूजा की तैयारी और विधि
भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं, चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें। ताजे फल और मिठाई का भोग लगाना शुभ होता है।
मन को शांत रखकर संकल्प लें
पूजा के दौरान मन को शांत रखें और पूरे दिन सात्विक रहने का संकल्प लें। अच्छे विचार और सकारात्मक सोच ही सच्ची भक्ति का आधार हैं।
व्रत का आहार
दिनभर फलाहार करें। दूध, मेवे और फल का सेवन कर सकते हैं। नमक और भारी भोजन से परहेज करें ताकि शरीर और मन दोनों शुद्ध रहें।
दीपदान और द्वार पूजन
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं और स्वास्तिक बनाएं। यह घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक है।
बड़ों का सम्मान करें
घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करें। मीठी वाणी और विनम्र व्यवहार इस दिन विशेष महत्व रखते हैं।
व्रत के दौरान इन गलतियों से बचें
घर में कलह से दूर रहें
इस दिन किसी भी प्रकार का झगड़ा या विवाद न करें। मन में शांति और प्रेम बनाए रखें।
भोजन में संयम रखें
नमक और तामसिक भोजन से पूरी तरह बचें। यह दिन आत्मसंयम और अनुशासन का है।
तुलसी पूजन के नियमों का पालन करें
बिना स्नान किए तुलसी के पत्ते न तोड़ें और किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
वाणी पर नियंत्रण रखें
कटु शब्दों से बचें। मधुर भाषा और शांत व्यवहार परिवार में सौहार्द बनाए रखता है।
पवित्रता बनाए रखें
पूरे दिन शारीरिक और मानसिक शुद्धता का ध्यान रखें। यही व्रत की वास्तविक सार्थकता है।
अक्षय तृतीया का संदेश
अक्षय तृतीया हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जीवन के कष्ट दूर किए जा सकते हैं। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविकास और नई ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर भी है।
इस पावन अवसर पर यदि पूरे मन से व्रत और पूजा की जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग स्वयं खुलने लगता है।