उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भले ही चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है। भाजपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और नेताओं को अपने पाले में लाने की कवायद में जुटे हैं। इसी बीच प्रदेश की राजनीति में दलबदल का बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने भाजपा को बड़ा झटका देने का काम किया है। दरअसल, भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। बीते रोज़ 19 अक्टूबर को दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था, जिसकी चर्चाए तेज़ रही और तभी से उनके कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। आपको बता दे, कि रामशरण नौटियाल की पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं है बल्कि वे प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता भी हैं, और चकराता विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं जिसके चलते जौनसार क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। खास बात ये है कि नौटियाल करीब 12 साल पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं, ऐसे में उनकी ये घर वापसी मानी जा रही है। जिसके बाद कांग्रेस इसे भाजपा में कार्यकर्ताओं के मोहभंग के तौर पर पेश कर रही है और दावा कर रही है कि कई अन्य और भाजपा नेता भी संपर्क में हैं, तो वहीं भाजपा इसे व्यक्तिगत फैसला बता रही है। ऐसे में अब सवाल है कि चकराता समेत आसपास के क्षेत्रों में उनकी एंट्री से कांग्रेस कितनी मजबूत होगी और क्या ये भाजपा के लिए बड़े नुकसान का संकेत है। बरहाल जो भी हो लेकिन इन सबके बीच सियासी सरगर्मियां जरूर तेज़ हो गई है, और आपसी बहस देखने को मिलने लगी हैं। चर्चा आज इसी पर
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने दिल्ली में कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. रामशरण नौटियाल ने कुछ दिनों पहले ही बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था, तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि रामशरण नौटियाल कांग्रेस में जाएंगे.वही 19 अक्टूबर को दिल्ली में रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है.आपको बता दे, 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने रामशरण नौटियाल को देहरादून जिले की चकराता विधानसभा सीट से टिकट भी दिया था, लेकिन वो कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह से हार गए थे. वहीं दिल्ली में रामशरण नौटियाल की ज्वाइनिंग के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अलावा उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी मौजूद रहे.हालांकि विपक्ष नौटियाल की एंट्री को भाजपा में सब कुछ ठीक न चलने का आरोप लगा रहे है.वही भाजपा रामशरण नौटियाल के जाने से चुनाव या भविष्य में कोई फर्क नहीं पड़ने की बात कहे रहा है.ऐसे में रामशरण नौटियाल के कोंग्रेस में जाने से क्या आने वाले समय पर बड़ा दल बदल हो सकता है.जो चुनावी समीकरण को बदल सकता है। ये नाराजगी है.या नए दल में शामिल होने पर कोई समझौता ये कहना बेहद अभी मुश्किल होगा।लेकिन राजनीति माहौल बेहद गर्म है.
कुलमिलाकर, रामशरण नौटियाल का भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाना सिर्फ एक व्यक्ति का दलबदल नहीं बल्कि 2027 से पहले सियासी संकेतों वाला घटनाक्रम है। प्रदेश के चकराता और जौनसार बावर क्षेत्र में नौटियाल परिवार की सामाजिक पकड़ रही है, ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि इसका सीधा लाभ उसे विधानसभा चुनाव में मिलेगा। वहीं भाजपा के लिए यह चुनौती है कि वह अपने पुराने कार्यकर्ताओं में भरोसा कैसे बनाए रखे। उधर, कांग्रेस इसे भाजपा के अंदर असंतोष के तौर पर भुनाने की कोशिश कर रही है, तो भाजपा इसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का फैसला बताकर डैमेज कंट्रोल में लगी है। लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में और भी कई नेता पाला बदल सकते हैं। अब देखना होगा कि नौटियाल की ये घर वापसी कांग्रेस के लिए कितनी कारगर साबित होती है और क्या भाजपा समय रहते अब अपनी रणनीति में कोई बदलाव करेगी। वही चुनाव से पहले उत्तराखंड में दलबदल के यह घटनाक्रम क्या वाकई सियासी मायने बदलने का संकेत दे रहा है, इसका जवाब आने वाले समय पर मिलेगा, जिसपर सबकी नज़रे जरूर टिकी हैं।