उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ अध्यात्म के लिए भी जाना जाता है, तभी राज्य को देवभूमि भी कहा जाता है। समय समय पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान, संस्कृति और परंपरा देवभूमि की पहचान है, जिनमें चारधाम यात्रा का विशेष स्थान है। हर साल चलने वाली इस विश्व प्रसिद्ध यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार भी यात्रा को सुगम बनाने के लिए हर जरूरी व्यवस्था करती आ रही है। क्योंकि चारधाम यात्रा ना केवल धार्मिक यात्रा बल्कि प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ भी मानी जाती है। पिछले वर्ष 2025 की बात करे तो भारी आपदाओं के बावजूद 52 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन कर रिकॉर्ड बनाया था। वही इस साल 19 अप्रैल 2026 से शुरु हुई चारधाम यात्रा ने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। 2023 के सबसे बड़े रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अब तक करीब 56 लाख श्रद्धालुओं ने चारों धामों के दर्शन किए हैं, जिसमें अकेले बद्रीनाथ और केदारनाथ में 36 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।वही सिखो के पवित्र गुरूद्वारे हिमकुण्ड साहिब के कपाट भी अपना इस साल का रिकॉड तोड़ते हुए बंद हो गए है.आपको बता दे, कि चारधाम यात्रा को महज़ अब एक माह कुछ दिनों का समय शेष रह गया है। उसके बाद करीब छह माह के लिए कपाट बंद कर दिये जायेंगे, और शीतकालीन यात्रा की तैयारी की जाएगी। पिछले रिकॉर्ड देखते हुए राज्य सरकार ने नए रिकॉर्ड का दावा भी किया। सरकार और सम्बन्धित संस्था का मानना है कि बेहतर प्रबंधन, ऑल वेदर रोड, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य सुविधाओं से श्रद्धालुओं को सरल और सहज दर्शन कराए जा रहे हैं इसलिए यात्रा अपने अंतिम चरण में पीक पर है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इन आंकड़ों को हवा हवाई बता रहा है। विपक्ष यात्रा के दौरान अव्यवस्थाओं और अन्य मुद्दों को जोड़कर सरकार को घेर रहा है, जिससे सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
देवभूमि की पहचान चारधाम यात्रा प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाती है। इस बार यात्रा ने नया कीर्तिमान बनाया है। 2023 के सबसे बड़े रिकॉर्ड को तोड़ते हुए आंकड़ा 56 लाख पार हो गया है, जिसमें सिर्फ बद्री-केदार में ही 36 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे हैं। पिछले साल भारी आपदाओं के बावजूद 52 लाख लोगों ने यात्रा की थी, इस बार सरकार ने ऑल वेदर रोड, मेडिकल और पेयजल व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा किया है। मानसून के बाद यात्रा फिर रफ्तार पर है और सरकार व संबंधित संस्थाएं इसे बेहतर प्रबंधन का नतीजा बता रहा है। तो वहीं विपक्ष इन आंकड़ों को हवा हवाई बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि जमीनी हकीकत कुछ और है, यात्रा में कई खामियां हैं। इसे लेकर सरकार और विपक्ष में जुबानी जंग तेज हो गई है।
कुलमिलाकर चारधाम यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ये सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और आर्थिकी की सबसे बड़ी ताकत है। 52 लाख से 56 लाख तक का सफर और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना, बेहतर व्यवस्थाओं का संकेत जरूर है।सरकार ऑल वेदर रोड, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी सुविधाओं को इसकी सफलता की वजह बता रही है, तो वहीं विपक्ष इन आंकड़ों को हवहवाई कह रहा है। सवाल ये भी है कि क्या रिकॉर्ड संख्या के साथ व्यवस्थाएं उतनी ही मजबूत है, जितना दावा किया जा रहा है। बहरहाल, मानसून के बाद अंतिम चरण में यात्रा का पीक पर होना राज्य के लिए शुभ संकेत है, लेकिन सरकार के दावों और विपक्ष के सवालों के बीच असली तस्वीर क्या है, ये तो आने वाले समय में ही साफ होगा, पर इतना तय है कि अंतिम चरणों में चल रही चारधाम यात्रा पर सियासत अभी और तेज जरूर होगी।