श्रावस्ती में सरकारी तालाब की जमीन पर बने मकानों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। स्थानीय परिवारों का दावा है कि उन्हें 2022 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत इन मकानों का लाभ मिला था। वहीं कानपुर में मेट्रो परियोजना के रास्ते में आ रहे कथित अवैध कब्जे को KDA ने हटाया।
Knews Desk- उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की कार्रवाई जारी है। श्रावस्ती के इकौना देहात थाना क्षेत्र में सरकारी तालाब की जमीन पर बने नौ मकानों को बुलडोजर से गिरा दिया गया। प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश और जमीन की पैमाइश के बाद की गई।
कार्रवाई की जद में आए परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जगह पर रह रहे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्के मकान उपलब्ध कराए गए थे। अब प्रशासन ने इन्हीं मकानों को सरकारी तालाब की जमीन पर बना अतिक्रमण बताते हुए ध्वस्त कर दिया।
मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। स्थानीय लोगों ने जमीन की पैमाइश को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि शुरुआत में जमीन की सीमा को लेकर अलग जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में कई मकानों को तालाब की जमीन के दायरे में शामिल कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी तालाब और जलस्रोतों की जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित लोगों को पहले नोटिस दिए गए थे और नियमानुसार पैमाइश की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
इधर, कानपुर के बर्रा-6 इलाके में भी कानपुर विकास प्राधिकरण यानी KDA ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 2,500 से 3,000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्रिस्तान के नाम पर कथित तौर पर कब्जा किया गया था। यह जमीन मेट्रो परियोजना के निर्माण में बाधा बन रही थी।
KDA की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने और संबंधित याचिका अदालत से खारिज होने के बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान जमीन के ऊपर बने चबूतरों और टीलों को हटाया गया। उनका दावा है कि जमीन के भीतर मौजूद संरचनाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। दोनों मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई के बाद संबंधित जमीन का निरीक्षण किया और उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने की प्रक्रिया पूरी की।