Knews Desk- उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे लड़कियों के लापता होने के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लापता बेटियों को खोजने के मामलों में गंभीरता की कमी दिखाई दे रही है। कोर्ट ने राज्य पुलिस को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे कई मामलों का जिक्र किया गया, जिनमें नाबालिग और युवतियां लंबे समय से लापता हैं, लेकिन पुलिस उन्हें खोजने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी बेटी के लापता होने की सूचना मिलती है तो शुरुआती घंटों में की गई कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि ऐसे मामलों में जांच की प्रगति क्या है और अब तक कितनी लड़कियों को सुरक्षित बरामद किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लापता बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों को सामान्य केस की तरह नहीं लिया जा सकता। यह सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों की समीक्षा की जाए और प्रत्येक जिले में विशेष अभियान चलाकर लापता लड़कियों की तलाश तेज की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि कई मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जांच की रफ्तार बेहद धीमी है। ऐसे मामलों में तकनीकी संसाधनों और आधुनिक जांच तरीकों का अधिक उपयोग करने की जरूरत है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लापता बेटियों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पुलिस को जवाबदेही के साथ काम करना होगा।