फीस नहीं भर पाए तो भोलेनाथ से लगाई गुहार, कांवड़ लेकर हरिद्वार से निकले मथुरा के 4 बच्चे

KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश के मथुरा से सामने आई एक भावुक तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा है। यहां एक परिवार के चार बच्चे अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की उम्मीद में कांवड़ लेकर हरिद्वार से मथुरा के लिए निकले हैं। बच्चों का कहना है कि परिवार आर्थिक परेशानी के कारण उनकी स्कूल फीस जमा नहीं कर सका, जिसके चलते उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। अब उन्होंने भगवान भोलेनाथ से अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कराने की गुहार लगाई है।

बताया जा रहा है कि चारों बच्चे 30 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले थे। बच्चों की इच्छा है कि वे भगवान शिव के दरबार में जल चढ़ाएं और अपनी पढ़ाई जारी रखने की मन्नत मांगें। बच्चों का विश्वास है कि भोलेनाथ उनकी पुकार सुनेंगे और उनकी शिक्षा फिर से शुरू हो सकेगी।

माता-पिता दोनों दिव्यांग, आर्थिक स्थिति कमजोर

बच्चों के पिता का नाम भरत और मां का नाम सुनीता बताया गया है। दोनों ही दिव्यांग हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी। फीस नहीं भर पाने की वजह से बच्चों को निजी स्कूल से बाहर कर दिया गया।

बच्चों की उम्र और कक्षाओं की बात करें तो सबसे बड़ी बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रेरणा की उम्र करीब 7 साल बताई गई है। बाकी दो बच्चे भी स्कूल में पढ़ते थे। आर्थिक परेशानी के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई है।

पढ़ाई शुरू कराने के लिए भोलेनाथ से मन्नत

कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे बच्चों का कहना है कि वे भगवान शिव से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो जाए। बच्चों की मासूम उम्मीद है कि भोलेनाथ उनकी परेशानी दूर करेंगे और उन्हें फिर से स्कूल जाने का मौका मिलेगा।

हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले इन बच्चों की यात्रा कई लोगों के लिए भावुक कर देने वाली है। बच्चों की आस्था के साथ-साथ यह मामला परिवार की आर्थिक मजबूरी और शिक्षा के लिए संघर्ष की तस्वीर भी सामने रखता है।

मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र का रहने वाला परिवार

बच्चों ने अपना घर मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र में बठैन गेट के पास बताया है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों से भी बच्चों की मदद करने की अपील की जा रही है।चारों बच्चे भगवान शिव के दरबार में अपनी मन्नत लेकर जा रहे हैं। अब देखना यह है कि उनकी यह पुकार कब और कैसे सुनी जाती है। हालांकि, बच्चों की कहानी यह सवाल भी खड़ा करती है कि आर्थिक मजबूरी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके, इसके लिए समाज और प्रशासन की ओर से किस तरह मदद पहुंचाई जा सकती है।

स्थानीय लोग यदि इस परिवार की मदद के लिए आगे आते हैं तो बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। आखिर शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और आर्थिक तंगी किसी बच्चे के भविष्य के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।

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