KNEWS DESK- अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आने के बाद में किए गए बदलाव अब एक बार फिर चर्चा में हैं। ट्रस्ट के नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने पूर्व अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की ओर से लिए गए कई फैसलों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। इसके तहत पहले हटाए गए कुछ कर्मचारियों की दोबारा बहाली की जा रही है, जबकि कई कर्मचारियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को वापस लेने या निष्प्रभावी करने का आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, नए महासचिव के पद संभालने के बाद ट्रस्ट में कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती को लेकर भी बदलाव किए जा रहे हैं। कुछ ऐसे कर्मचारियों को उनके पुराने पद और दायित्व सौंपे गए हैं, जिन्हें पिछली व्यवस्था के दौरान हटाया गया था या जिनके पटल बदल दिए गए थे।
शिकायतों के बाद हटाए गए थे कर्मचारी
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए।
कृष्ण मोहन के कार्यकाल में शिकायतों के आधार पर कुछ कर्मचारियों को हटाया गया था। कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और कुछ के कार्यक्षेत्र तथा जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया था। इनमें कुछ ऐसे कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्हें ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोगों का करीबी बताया जाता था।
गोविंद देव गिरि ने बदले कई फैसले
2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक के बाद स्वामी गोविंद देव गिरि को पूर्णकालिक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने पिछली व्यवस्था में लिए गए कुछ फैसलों की समीक्षा शुरू की। इसी क्रम में गोपाल राव के करीबी माने जाने वाले सोमेश अलंदी को तीर्थ क्षेत्र पुरम से वापस राम मंदिर में तैनात करने का आदेश दिया गया।
इसके अलावा कई कर्मचारियों को जारी कारण बताओ नोटिस वापस लेने अथवा उन्हें निष्प्रभावी करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों के पटल परिवर्तन से जुड़े कुछ पुराने आदेशों को भी बदलते हुए पहले वाली जिम्मेदारियों को बहाल किया जा रहा है।
केडी तिवारी और बजरंग पाठक की भी वापसी
पिछले दिनों शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता के साथ केडी तिवारी और बजरंग पाठक को भी उनकी पुरानी जिम्मेदारियों के साथ बहाल किया गया है। संदीप गुप्ता पहले तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था से जुड़े काम में तैनात थे।
संदीप गुप्ता को एक विदेशी महिला की शिकायत के बाद इस व्यवस्था से हटाया गया था। बताया गया कि लॉकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद महिला ने ट्रस्ट को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में उन्हें काम से हटा दिया गया था।
संदीप गुप्ता की बहाली की सिफारिश
संदीप गुप्ता की आर्थिक स्थिति और शहीद कारसेवक के परिवार से उनके संबंध को देखते हुए उन्हें दोबारा मंदिर में काम देने की सिफारिश की गई थी। नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के सामने भी उनकी बहाली की मांग रखी गई। इसके बाद उन्हें फिर से बहाल करते हुए पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी गई।
ट्रस्ट में अब दर्जनों कर्मचारियों को जारी कारण बताओ नोटिस और पटल परिवर्तन के आदेशों की भी समीक्षा की जा रही है। इन फैसलों के पलटने से राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है।