Knews Desk– महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी एक नई मांग सामने आई है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े मामलों में अपने कानूनी अधिकारों के मुताबिक फैसला लेने की अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
क्या है ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’?
SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में नाम, उम्र, माता-पिता की जानकारी या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मैपिंग जैसी विसंगतियां सामने आती हैं। इन्हें ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तौर पर चिन्हित किया जाता है। इसका मतलब अपने आप में यह नहीं है कि संबंधित मतदाता फर्जी है।
ERO को अधिक अधिकार देने की मांग
महाराष्ट्र CEO ने मांग की थी कि यदि ERO उपलब्ध दस्तावेजों से संतुष्ट हैं, तो मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने से छूट देने का विकल्प सॉफ्टवेयर में होना चाहिए। उन्होंने ऐसे दस्तावेजों को भी स्वीकार करने की व्यवस्था का सुझाव दिया था, जो निर्धारित सूची में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनकी वैधता और प्रासंगिकता से अधिकारी संतुष्ट हों।
चुनाव आयोग ने किए बदलाव
26 सितंबर की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि ‘अनमैप्ड’ और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मामलों में BLO मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ERO मामले पर फैसला करेगा। सामान्य तौर पर ऐसे मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में ERO सुनवाई करा सकता है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन रखा जाएगा।
ECINet की समीक्षा के लिए समिति
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि ECINet की समीक्षा एक समिति करेगी। इसमें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के अलावा IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा, ताकि यह जांचा जा सके कि सॉफ्टवेयर चुनाव कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।