आगराः 3 मौतों के बाद भी नहीं जागा नगर निगम तो भाजपा पार्षद ने घुटनों तक गंदे नाले में खड़े होकर काटा जन्मदिन का केक

अजेन्द्र चौहान- ताज नगरी आगरा से डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोलती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर में नाले के निर्माण और सफाई न होने से नाराज सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के ही एक पार्षद ने नगर निगम के खिलाफ बेहद अनोखा और आक्रोशित विरोध दर्ज कराया है। वार्ड के विकास और जनता की सुध न लिए जाने से क्षुब्ध होकर भाजपा पार्षद किशन नायक ने अपने जन्मदिन के मौके पर किसी आलीशान जगह या एसी कमरे में जश्न मनाने के बजाय, घुटनों तक बदबूदार और गंदे नाले के पानी में उतरकर केक काटा। पार्षद का यह अनोखा प्रदर्शन इस समय पूरे प्रदेश में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।

शाही कैनाल बनी जानलेवा नाला, अब तक तीन मासूमों ने गंवाई जान

लंगड़े की चौकी स्थित नगला हरमुख क्षेत्र से भाजपा पार्षद किशन नायक ने नाले के भीतर खड़े होकर मीडिया और क्षेत्रीय जनता के सामने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि सुल्तानगंज की पुलिया से शुरू होकर लंगड़े की चौकी होते हुए यह नाला जीवनी मंडी रोड के रास्ते सीधे यमुना नदी तक जाता है। इतिहास में यह एक ‘शाही कैनाल’ (शाही नहर) हुआ करती थी, जिसे देखरेख के अभाव में आज एक बदबूदार और जानलेवा नाले में तब्दील कर दिया गया है। पार्षद ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस खुले और जर्जर नाले में गिरकर अब तक दो मासूम बच्चों और एक स्थानीय किसान की तड़प-तड़प कर मौत हो चुकी है। यहाँ तक कि नाले के तेज बहाव में बहे एक बच्चे का शव तो आज तक बरामद भी नहीं किया जा सका है। इतनी बड़ी त्रासदियों के बाद भी आगरा नगर निगम के अधिकारी कुंभकरणीय नींद सो रहे हैं और क्षेत्र की जनता को मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

“जनता गंदगी में शादियां कर रही, तो मैं एसी कमरे में केक कैसे काटूं?”

बृहस्पतिवार शाम को हनुमान मंदिर के पास जब पार्षद किशन नायक अपने समर्थकों के साथ पहुँचे, तो उनके हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर लिखा था—हनुमान जी कल्याण करें”। नाले के गंदे पानी में खड़े होकर केक काटने की वजह बताते हुए भावुक पार्षद ने कहा, “मेरे क्षेत्र की जनता सालों से जलभराव, बजबजाती गंदगी और नाले के इसी बदबूदार पानी के बीच अपने बच्चों का जन्मदिन और शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यक्रम करने को मजबूर है। जब मेरी जनता चौबीसों घंटे इस नरक को झेल रही है, तो मैं एक जनप्रतिनिधि होकर अधिकारियों की तरह एसी कमरों में बैठकर अपना जन्मदिन कैसे मना सकता हूँ? मुझे भी अपनी जनता के इसी दर्द का अहसास करना था।

3 साल में 30 से ज्यादा पत्र, पर 15 साल से सिर्फ कागजों पर हो रही सफाई

पार्षद किशन नायक ने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह संवेदनहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्षद बने तीन साल का समय बीत चुका है। इस दौरान वह आगरा की मेयर हेमलता दिवाकर, नगर आयुक्त और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी संजीव वर्मा को 30 से अधिक बार लिखित शिकायत और पत्र सौंप चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। स्थानीय निवासियों और पार्षद का दावा है कि आखिरी बार इस नाले की जमीनी स्तर पर मुकम्मल सफाई लगभग 15 साल पहले साल 2011 में हुई थी। उसके बाद से हर साल करोड़ों रुपये का बजट आता है, लेकिन नाले की सफाई केवल अधिकारियों की फाइलों और कागजों पर ही सिमट कर रह जाती है। जमीनी हकीकत यह है कि नाला पूरी तरह सिल्ट और कचरे से पटा हुआ है, जिससे हल्की सी बारिश में भी पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है।

घेरे में प्रशासनिक अमला, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

हाथ में मोमबत्ती लगा केक लेकर गंदे पानी के बीच खड़े पार्षद और उनके पीछे ‘हनुमान जी कल्याण करें’ का बैनर थामे समर्थकों का यह वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। स्थानीय जनता भी अब पार्षद के समर्थन में उतर आई है और नगर निगम के खिलाफ सामूहिक प्रदर्शन की चेतावनी दे रही है। सत्ताधारी दल के ही पार्षद द्वारा इस तरह बीच नाले में उतरकर सिस्टम की अर्थी निकालने के बाद अब देखना यह होगा कि क्या आगरा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें खुलती हैं या फिर लंगड़े की चौकी के निवासियों को इस नारकीय जीवन और मौतों के साए में ही जीने को मजबूर रहना पड़ेगा।

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