Uber का बड़ा दांव: सड़कों पर उतारने की तैयारी 1.2 लाख ड्राइवरलेस कैब, क्या ड्राइवरों के रोजगार पर पड़ेगा असर?

Knews Desk- टैक्सी बुक करने के बाद अगर आपके सामने ऐसी कार आ जाए, जिसमें कोई ड्राइवर ही न हो, तो आने वाले समय में यह नजारा आम हो सकता है। कैब सर्विस कंपनी Uber ऑटोनॉमस यानी बिना ड्राइवर वाली टैक्सी सर्विस को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस सेक्टर में करीब 10 अरब डॉलर यानी लगभग 95 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत करीब 1.2 लाख ड्राइवरलेस गाड़ियों को सड़कों पर उतारने का लक्ष्य बताया जा रहा है।

Uber की इस तैयारी ने रोबोटैक्सी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के संकेत दिए हैं। वहीं, इस बदलाव के साथ एक बड़ा सवाल रोजगार को लेकर भी खड़ा हो रहा है—अगर बिना ड्राइवर वाली टैक्सियों की संख्या तेजी से बढ़ी तो Uber से जुड़े मौजूदा ड्राइवरों पर इसका कितना असर पड़ेगा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, Uber आने वाले वर्षों में ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य करीब 1,20,000 ड्राइवरलेस वाहनों को अपने नेटवर्क से जोड़ना है। इससे संकेत मिलता है कि रोबोटैक्सी तकनीक अब केवल परीक्षण तक सीमित न रहकर बड़े स्तर पर कमर्शियल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बन सकती है।

कई शहरों में विस्तार पर नजर

Uber के CEO दारा खोसरोशाही पहले भी ऑटोनॉमस मोबिलिटी को कंपनी के भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा बता चुके हैं। कंपनी अलग-अलग बाजारों में ड्राइवरलेस राइड सर्विस का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।

Uber खुद सभी ऑटोनॉमस वाहन विकसित करने के बजाय इस क्षेत्र में काम करने वाली टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ साझेदारी का रास्ता अपना रही है। इसके जरिए कंपनी अपनी मौजूदा कैब बुकिंग सर्विस में रोबोटैक्सी को शामिल करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

ड्राइवरलेस कैब की बढ़ती संख्या के बीच सबसे बड़ी चिंता रोजगार को लेकर है। Uber के प्लेटफॉर्म से दुनिया भर में बड़ी संख्या में ड्राइवर जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर रोबोटैक्सी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा तो भविष्य में इंसानी ड्राइवरों को मिलने वाली ट्रिप्स प्रभावित हो सकती हैं।

हालांकि, यह बदलाव तुरंत होने की संभावना कम है। शुरुआती दौर में ड्राइवरलेस टैक्सियां चुनिंदा शहरों और निर्धारित इलाकों में ही चल सकती हैं। खराब मौसम, जटिल ट्रैफिक, संकरी सड़कें और अलग-अलग देशों के नियम अभी भी ऑटोनॉमस वाहनों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

बदल सकता है कैब इंडस्ट्री का मॉडल

ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक के ज्यादा सुरक्षित और किफायती होने के साथ इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है। एयरपोर्ट पिकअप-ड्रॉप, बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, सिटी सेंटर और निर्धारित शहरी रूट जैसे क्षेत्रों में रोबोटैक्सी का इस्तेमाल पहले बढ़ने की संभावना है।

ऐसी स्थिति में पारंपरिक ड्राइवरों के लिए उपलब्ध राइड्स की संख्या कम हो सकती है। हालांकि, पूरी तरह से इंसानी ड्राइवरों की जगह ऑटोनॉमस वाहनों के लेने में लंबा समय लग सकता है।

ड्राइविंग घटेगी तो नई तरह की नौकरियां भी बनेंगी

ड्राइवरलेस वाहनों के विस्तार का मतलब केवल नौकरियां खत्म होना नहीं है। बड़े ऑटोनॉमस फ्लीट को संचालित करने के लिए नए प्रकार के रोजगार भी पैदा हो सकते हैं। इनमें रिमोट व्हीकल मॉनिटरिंग, तकनीकी मेंटेनेंस, बैटरी चार्जिंग, वाहन की सफाई, फ्लीट मैनेजमेंट और कस्टमर सपोर्ट जैसे काम शामिल हो सकते हैं।

फिलहाल ऑटोनॉमस टैक्सियों और इंसानी ड्राइवरों के साथ-साथ काम करने वाला हाइब्रिड मॉडल ही ज्यादा व्यावहारिक नजर आता है। लेकिन Uber का अरबों डॉलर का निवेश यह जरूर संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में कैब इंडस्ट्री में ड्राइवरलेस तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ सकती है।

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