Knews Desk- उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित नारी निकेतन और वन स्टॉप सेंटर आज उन युवतियों के लिए सहारा बने हुए हैं, जिन्हें कभी प्यार में धोखा मिला तो कभी अपने ही परिवार ने ठुकरा दिया। शादी के सपने लेकर घर छोड़ने वाली कई लड़कियां आज इन आश्रय गृहों में रह रही हैं और उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आखिर जाएं तो कहां। जिला प्रशासन इन युवतियों के सुरक्षित पुनर्वास की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई मामलों में परिवारों के उन्हें स्वीकार न करने से यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है।बरेली के नारी निकेतन की दीवारों के पीछे ऐसी कई दर्दनाक कहानियां छिपी हैं, जो रिश्तों के टूटने और भरोसे के बिखरने की तस्वीर पेश करती हैं। इनमें एक युवती असम की रहने वाली है। वह अपने प्रेमी के झूठे वादों पर भरोसा कर अपना घर और परिवार छोड़कर बरेली आ गई थी। कुछ दिन साथ रखने के बाद युवक ने कथित तौर पर उसका सौदा दूसरे व्यक्ति से कर दिया और पैसे लेकर फरार हो गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को सुरक्षित रेस्क्यू किया और नारी निकेतन पहुंचाया। कई महीनों से वह अदालत के आदेश का इंतजार कर रही है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चिंता यही है कि बाहर निकलने के बाद उसका अपना कौन होगा।
ऐसा ही एक मामला पीलीभीत की रहने वाली एक मेधावी छात्रा का है, जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई के दौरान उसकी पहचान बरेली के एक युवक से हुई। युवक ने शादी का भरोसा दिलाकर उसे अपने पास बुला लिया, लेकिन जब शादी की बात परिवार तक पहुंची तो उसने समाज और प्रतिष्ठा का हवाला देकर रिश्ता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। घर लौटने का साहस खो चुकी युवती ने अपनी सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर का सहारा लिया, जहां उसे फिलहाल संरक्षण और काउंसलिंग दी जा रही है।दिल्ली की एक युवती की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। उसने बरेली के एक युवक से कोर्ट मैरिज की थी और दोनों साथ रह रहे थे। लेकिन गर्भवती होने के बाद जब परिवारों को इस रिश्ते की जानकारी मिली तो दबाव बढ़ने लगा। आरोप है कि परिवार के दबाव में पति ने भी उससे दूरी बना ली। अब दोनों पक्षों की काउंसलिंग वन स्टॉप सेंटर में कराई जा रही है ताकि किसी समाधान तक पहुंचा जा सके।
लखनऊ की एक अन्य युवती का दर्द भी अलग नहीं है। माता-पिता के अलग होने के बाद वह भावनात्मक रूप से अकेली पड़ गई थी। इसी दौरान एक युवक ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और वह घर छोड़कर उसके साथ चली गई। परिस्थितियां बिगड़ने पर उसे नारी निकेतन में आश्रय मिला। युवती का कहना है कि उसकी सगी मां उससे मिलने तक नहीं आती, जबकि नारी निकेतन की अधीक्षिका ने उसे मां जैसा स्नेह दिया है। यही वजह है कि अब वह अपने घर वापस नहीं जाना चाहती।जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) मोनिका राणा के अनुसार, नारी निकेतन और वन स्टॉप सेंटर में आने वाली हर युवती की मानसिक काउंसलिंग कराई जाती है। प्रशासन उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें दोबारा सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। हालांकि कई मामलों में परिवार लड़कियों को अपनाने से साफ इनकार कर देते हैं, जिससे पुनर्वास की प्रक्रिया और कठिन हो जाती है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के आदेश और संबंधित युवती की लिखित सहमति के बाद ही सुरक्षित पुनर्वास की अंतिम कार्रवाई की जाती है। प्रशासन का उद्देश्य इन युवतियों को दोबारा सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।