शिव शंकर सविता- बीते दिन कानपुर में युवा वकील की आत्महत्या करने की घटना ने शहरवासियों को अंदर से झकझोर दिया है। युवा वकील प्रियांशु ने परिवार के दबाव, बार-बार बेइज्जत होने, हमेशा शक की निगाहों से देखे जाने और करियर की चिंता को लेकर जिस तरह से कचहरी की बिल्डिंग से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, उससे साथी अधिवक्ता, नगरवासी, रिश्तेदार और परिचित अचंभित हो उठे हैं। दिवंगत अधिवक्ता प्रियांशु ने आत्महत्या करने से पहले दो पन्नों का सुसाइट नोट लिख अपने स्टेट्स में लगाया, जिसमें उसने बचपन से लेकर अभी तक की सारी पीड़ाओं को क्रमवार दर्शाया है। दिवंगत अधिवक्ता का सुसाइट नोट जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में वायरल होने लगा, उसे पढ़कर लोगों का गुस्सा दिवंगत के पिता पर गुस्सा फूट पड़ा। देखिए क्या लिखा है सुसाइट नोट में….
अंतिम इच्छा है कि सभी लोग इस सुसाइट नोट को अंत तक पढ़े….
मेरी ये अंतिम इच्छा है कि सब लोग मेरे इस सुसाइड नोट को अंत तक पढ़ें। मैं प्रियांशु श्रीवास्तव (प्रशिक्षु अधिवक्ता) पुत्र राजेंद्र श्रीवास्तव उम्र 23 साल 11 महीने 7 दिन, निवासी वरुण विहार, बर्रा-8 कानपुर सिटी का हूं। आज 23 अप्रैल समय दोपहर 12.05 बजे मैं अपने पूरे होश-ओ-हवास नें बिना किसी जोर दबाव एवं जबरदस्ती के अपनी पूर्ण सहमती से यह सुसाइड नोट लिखकर अपनी जान दे रहा हूं।

मैं एक रजिस्टर्ड अधिवक्ता हूं जिसने अपनी लॉ की पढ़ाई कानपुर सिटी से 2025 से पूरी की है। समय की कमी होने के चलते मैं अपना पंजीकरण उत्तर प्रदेश बार काउंसिल प्रयागराज से प्राप्त नहीं कर सका हूं। कहानी शुरू होती है मेरे बचपन से, जहां करीब 5 या 6 साल की उम्र में ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलती शुरू हो गईं। बताने में तो मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही है, लेकिन मैं आज से सारी बातें जरूर बताना चाहूंगा क्योंकि जो आज मैं यह कदम उठाने जा रहा हूं भविष्य में ऐसी नौबत किसी के साथ न आ जाए।
इज्जत खोने के डर से मथुरा भाग गया था…
पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा टॉर्चर देना, परीक्षा के एक दिन पहले मारने पीटने लग जाना एक हद तक को ठीक लगता है। मगर हर समय शक की नजर से देखना, हर एक दो मिनट का हिसाब लेना कहीं ना कहीं मानसिक टॉर्चर ही है। इस टॉर्चर के साथ मैं ज्यादा समय तक नहीं जी सकता है। सख्ती, लगाव और प्रेन इस सीमा तक भी नहीं होना चाहिए कि वो नफरत में बदल जाए.बात है साल 2026 की क्लास 9 के प्रवेश के दौरान मेरे पापा ने यह शर्त रखी कि अगर मैं कंप्यूर एंड फिजीकल एजुकेशन के विषयों में कंप्यूर का चयन नहीं करूंगा तो वो मुझे निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। उनके दबाव में आके मैंने ऐसे विषय का चयन किया, जिसमें मेरी रूचि ही नहीं थी। नतीजा ये रहा कि ज्यादा पढ़ने के बावजूद उस वक्त मेरे उस विषय में ठीक नंबर नहीं आए। साल 2026 में घर के निर्माण कार्य में करीब 4 महीने तक का समय लग जाने के कारण 10वीं में मेरी पढा़ई प्रभावित हुई। रिजल्ट आने से पहले पापा ने मुझे धमकी दी कि अगर हाईस्कूल में नंबर कम आए तो निर्वस्त्र करके घर से भगा देंगे। घर और समाज में इज्जत खोने के डर से मैं घर से भाग गया था. मैं मथुरा पहुंच गया था।
मैं घर पर बोझ न बनूं… इसलिए शुरू किया अपना काम
छोटी उम्र में अगर मैंने सही-गलत और ज्ञान के अभाव में एक या दो रुपये का सिक्का टॉफी खाने के लिए चुरा लिया तो आज की तारीख तक घर से जुड़े किसी विवाद में बहस के समय पापा मुझे चिल्ला-चिल्ला कर गाली देकर मोहल्ले में मेरी बेइज्जती करते हैं। हाईस्कूल की परीक्षा में मेरे 60 प्रतीशत आए थे। मैं मिडिल फैमिली से आता हूं। मैं घर पर बोझ ना बनूं, इसके लिए मैंने ट्यूशन पढ़ानी शुरू की। जब महसूस किया कि इस काम में ज्यादा मेहनत है तो मैंने खुद का ऑनलाइन इंटरनेट वर्क शुरू किया. मैं अपने खर्च खुद उठाता था। घर में दैनिक खर्च भी देता था। लेकिन इस सब प्रयासों के बावजूद पिता मुझे……….. जैसे अपशब्दों का इस्तेमाल करके जलील करते हैं।

घर के बाहर चिल्ला-चिल्ला कर मेरी बेइज्जती करते हैं। मैं दिनभर उनके कचहरी के काम में उनका सहयोग करता हूं। न मेरे कोई गलत शौक हैं और न ही किसी गलत संगत में लिप्त हूं। पूरा दिन सिर्फ अपने काम को बढ़ाने की कोशिश करता हूं। बावजूद इसके मुझे सिर्फ और सिर्फ जलील किया जा रहा है। बात बात पर मुझे घर से बाहर निकालने की धमकी ऑफिस से निकालने की धमकी दी जा रही है। 24 घंटे मैंने जिनके लिए काम किया वो मुझे जलील करते रहते हैं। उनके लिए मैंने अपना हर काम छोड़ा. हर पल हर मिनट ये पूछा जाता है कि कब आओगे, किससे बात कर रहे हो, किसका फोन आया. जरूरत से ज्यादा मेरी जिंदगी में दखल दिया जाता है। मेरी जिंदगी मुझे घुटन की तरह लगती है. आज उन्होंने पूरे मोहल्ले में सबके सामने मेरे ऊपर चिल्लाकर मेरी फिर बेइज्जती की, मुझे झूठा साबित कर नीचा दिखाने की कोशिश करते गई। उन्हें उनकी जीत मुबारक हो।
पापा जीत गए… मैं हार गया…
आज मैं कचहरी परिसर में आत्महत्या करने जा रहा हूं। क्योंकि इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ मैं और नहीं जी सकता, मैं जा रहा हूं। मां बाप की 25वीं वर्षगांठ के लिए मैंने अपनी क्षमतानुसार चांदी की अंगूठी गिफ्ट में देने की बात घर पर बताई थी। परंतु कुछ बात ऐसे बेटे को डिजर्व नहीं करते. सभी मां बाप से अपील है कि बच्चों पर उतनी ही सख्ती बरतें जितना वो बर्दाश्त कर सके। मेरा निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी ना पाएं. मैं उनपर कोई और कार्रवाई नहीं चाहता हूं। ताकि मेरा परिवार बर्बाद न हो। भगवान करे ऐसे पिता किसी को ना मिलें। अगर किसी को लगता है कि मैं झूठा हूं तो मेरी मां-बहन और पड़ोसियों से मेरे बारे में पूछ लेना। मेरे सारे एफर्ट्स भविष्य में कुछ बनने के सपने सब खत्म हो गए। मैं हार गया, पापा जीत गए, उनको मुबारक।