Knews Desk– बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया. नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी के मौके पर मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. इसी दौरान मंदिर जाने वाले रास्ते पर अचानक भगदड़ मच गई. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत की सूचना है, जबकि 12 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर गए.प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रात में मंदिर जाने वाले रास्ते के किनारे बिजली का पोल तार समेत गिर गया था. इसके बाद बैरिकेडिंग में इस्तेमाल किया गया बांस-बल्ला बिजली के पोल में फंस गया, जिससे पोल टेढ़ा हो गया. सोमवार सुबह श्रद्धालुओं के बीच बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह फैल गई. देखते ही देखते यह अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और लोगों में दहशत पैदा हो गई.
अफवाह के बाद श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. इसी दौरान अशोकधाम स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर लगी बैरिकेडिंग टूट गई. भीड़ का दबाव अचानक बढ़ने से कई लोग जमीन पर गिर गए और उनके ऊपर दूसरे श्रद्धालु भी गिरते चले गए. भगदड़ में कई लोग भीड़ के नीचे दब गए. स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल भेजा गया.
हादसे में जान गंवाने वालों में ज्यादातर महिलाएं बताई जा रही हैं. घायलों को लखीसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. फिलहाल अधिकारियों ने हालात को नियंत्रित कर लिया है और मंदिर परिसर में राहत-बचाव कार्य जारी है.लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि वह सुबह करीब साढ़े तीन बजे से मौके पर मौजूद थे. उनके मुताबिक, करीब साढ़े छह बजे अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई और बैरिकेडिंग टूटने के बाद लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए. डीएम और एसपी समेत प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, घायलों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
बताया जा रहा है कि अशोकधाम मंदिर से अशोकधाम हॉल्ट तक करीब दो किलोमीटर के रास्ते में श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी. नाग पंचमी और सावन की सोमवारी होने के कारण मंदिर में सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ रही थी. ऐसे में अचानक भगदड़ की स्थिति पैदा होने से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई.इस हादसे ने मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम कितने प्रभावी थे, इसकी जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है. प्रशासन ने घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे वास्तव में किन परिस्थितियों की भूमिका रही और कहीं सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही तो नहीं हुई