उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में सुधार व शुद्धिकरण करने के लिए विशेष गहन परीक्षण यानी की एस आई आर की प्रक्रिया चल रही है. वही एस आई आर प्रक्रिया के प्रथम चरण ने ही प्रदेश की पलायन हकीकत को बयां कर दिया है. उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है. जिसके हिसाब से एस आई आर के बाद उत्तराखंड में 8,26,977 मतदाताओं के नाम कटे हैं. देहरादून जिले में 1,86,008 मतदाताओं के नाम कटे हैं. हरिद्वार जिले में 130203 मतदाताओं के नाम कटे हैं. जो मुख्य वजह पलायन के साथ उत्तराखंड की बढ़ती आबादी का आईना भी है. सबसे ज्यादा वोट देहरादून में 186000 उधम सिंह नगर में 177000 और हरिद्वार में 130000 कम हुए हैं. इन तीनों मैदानी क्षेत्रों में ही सबसे ज्यादा बाहरी आबादी बसने की बात लंबे समय से कहीं जा रही है. जांच के दौरान सत्यापन में बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए जो या तो दो राज्यों की वोटर लिस्ट में अटैच है या फिर निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे है, अगर विधानसभा आकड़ो पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. देहरादून जिले में धर्मपुर विधानसभा से करीब 29 हजार देहरादून जिले के ऋषिकेश से 27000 वोट कम हुए, उधम सिंह नगर में काशीपुर से 28700 और बाजपुर से 28500 वोट कम है, हरिद्वार जिले में हरिद्वार विधानसभा से 19700 और रानीपुर से करीब 19000 वोट कम हुए यानी जिन इलाकों में सबसे ज्यादा आबादी का दबाव बढ़ा, वही सबसे ज्यादा नाम भी सूची से बाहर नजर आए. दूसरी तस्वीर पहाड़ की है और यह भी चिंता बढ़ने वाली है. अल्मोड़ा में करीब 55000 और पौड़ी गढ़वाल में 51000 वोट कम हुए हैं. यह आंकड़े साफ जता रहे हैं कि पलायन की रफ्तार अभी भी थमी नहीं है. कही न कही यह घटते वोट ने चिंता बढ़ाने का काम तो किया ही है, यही कारण है कि इस विषय ने राजनितिक गलिआरो में भी तूल पकड़ लिया है. जिसके चलते कांग्रेस इसको सरकार की नाकामी बता रही है. वही भाजपा पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों का हवाला दे रही है,
उत्तराखंड में चल रहे एसआईआर अभियान अंतिम चरण में है. दरअसल, राज्य में 8 जून से एसआईआर अभियान शुरू हुआ था, जो 7 जुलाई को पूरा हुआ. खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 88.99 फीसदी गणना फॉर्म को डिजिटल किया जा चुका है.जहां एक ओर इन सभी डाटा को दुरुस्त कर फाइनल आंकड़ा तैयार किया जाएगा. वहीं, दूसरी ओर पोलिंग बूथ की मैपिंग फिर से की जाएगी, ताकि मतदाताओं के आधार पर पोलिंग बूथों का निर्धारण किया जा सके. इसके साथ ही 14 जुलाई को मतदाता सूची का ड्राफ्ट पब्लिश किया गया.लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती ड्राफ्ट सूची में 826000 वोटर कम हुए हैं.जबकि 19 लाख से ज्यादा मतदाताओं के विवरण में आप भी त्रुटियां दर्ज, यानी दावों आपत्तियों और अंतिम सत्यापन के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है स्पष्ट है कि फाइनल वोटर लिस्ट आने पर कई विधानसभा क्षेत्र में वोटर की संख्या और बदलेगी और बदलेगा 2027 के चुनाव का राजनीतिक समीकरण भी. हालांकि राजनितिक दल अपने अपने दावे जरूर पेश करते दिखाई दे रहे है और एक दूसरे पर आरोप भी लगा रहे है लेकिन दूसरी ओर अंदर ही अंदर राजनीतिक दलों की टेंशन भी बढ़ती दिखाई दे रही है।
उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है. जिसके हिसाब से एस आई आर के बाद उत्तराखंड में 8,26,977 मतदाताओं के नाम कटे हैं.करीब 8 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जाने हैं,जबकि प्री एस आई आर के दौरान भी लगभग पांच लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं. कुल मिलाकर साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो आगामी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं की संख्या में एक बड़ा अंतर देखने को मिलेगा.जो शायद बड़ी पार्टियों को सरकार बनाने के लिए महत्वपूर्ण घाटे का सौदा हो सकता है.जिसकी वजह से सभी दलों में अपनी सीट निकालने के लिए कड़ी मशकक्त करनी पड़ सकती है.यही वजह है सभी दलों में चुनाव आने से पहले बड़ी हलचल मची हुई है.