शिक्षा बचाओ अभियान के तहत एसएफ़आई कानपुर का फूलबाग में प्रदर्शन

शिक्षा के निजीकरण, बढ़ती फीस और छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ बुलंद हुई आवाज़

कानपुर – स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफ़आई), कानपुर जिला कमेटी द्वारा आज “शिक्षा बचाओ अभियान” के अंतर्गत फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर एक प्रभावशाली प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम महंगी होती शिक्षा, निजी विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों की लगातार बढ़ती फीस, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण तथा शिक्षा के अधिकार की रक्षा के प्रश्नों को लेकर आयोजित किया गया। इस अवसर पर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक एवं अन्य छात्र-छात्राओं के संघर्ष के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसएफ़आई उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सदस्य एवं जिला सहसंयोजक आराध्य बाजपेयी ने कहा कि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है। शिक्षा को बाज़ार की वस्तु बनाना संविधान की समान अवसर और सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा के व्यापारीकरण पर रोक लगाते हुए सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

जिला संयोजक महबूब आलम ने कहा कि निजी विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों की लगातार बढ़ती फीस, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएँ, छात्रवृत्तियों में देरी तथा शिक्षा के बढ़ते निजीकरण ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। सरकार की प्राथमिकता शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना होना चाहिए, न कि उसे केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित करना।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा छात्रों की न्यायोचित मांगों का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। शांतिपूर्ण आंदोलनों के प्रति दमनात्मक रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

कार्यक्रम के माध्यम से एसएफ़आई कानपुर ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—

  • शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • निजी विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों की मनमानी फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
  • सभी विद्यार्थियों के लिए समान, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
  • सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने हेतु शिक्षा बजट में पर्याप्त वृद्धि की जाए।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
  • राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक एवं प्रभावी संस्थागत सुधार किए जाएँ।
  • छात्रवृत्ति का बजट बढ़ाया जाए तथा सभी पात्र विद्यार्थियों को समयबद्ध छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाए।
  • नए छात्रावासों का तत्काल निर्माण कराया जाए तथा छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
  • कानपुर मेट्रो में सभी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत छात्र किराया रियायत प्रदान की जाए।
  • छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में 24×7 केंद्रीय पुस्तकालय, पर्याप्त अध्ययन कक्ष तथा आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
  • शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलनों का सम्मान किया जाए तथा छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर सकारात्मक संवाद किया जाए।

एसएफ़आई कानपुर ने स्पष्ट किया कि “शिक्षा बचाओ अभियान” केवल एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, छात्र अधिकारों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा एक व्यापक जन-अभियान है। संगठन ने छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों एवं समाज के सभी लोकतांत्रिक नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महबूब आलम, आराध्य बाजपेयी, जुनैद मंसूरी, अश्वनी मिश्रा, वैष्णवी सक्सेना, मोहम्मद अल्ताफ, मरियम जमील, प्रतीक , करण वर्मा , उमेर , आदर्श कुमार, मोहम्मद अदनान सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं एसएफ़आई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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