Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्णा मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए. जस्टिस समीर जैन की पीठ ने उन्हें पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के निर्देशों के पालन में कथित लापरवाही को लेकर तलब किया था.
Knews Desk- उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश हुए. जस्टिस समीर जैन की पीठ ने उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए बुलाया था कि पुलिस अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन करने में कथित तौर पर देरी या अनिच्छा क्यों दिखाते हैं. कोर्ट ने पुलिस जांच की गुणवत्ता और अदालत के निर्देशों के समय पर पालन को लेकर गंभीर चिंता जताई.
मामला हत्या के आरोप से जुड़ी एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया था. हाईकोर्ट ने पाया था कि पुलिस अधिकारियों की ओर से अदालत के निर्देशों का समय पर पालन नहीं किए जाने के कारण हत्या के मामलों में जमानत याचिकाओं की सुनवाई लंबे समय तक प्रभावित हो रही है. इसी को लेकर कोर्ट ने DGP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था.
मंगलवार की सुनवाई में पीठ ने पुलिस जांच की गुणवत्ता, कोर्ट के आदेशों के अनुपालन और जांच से जुड़े निर्देशों व रिकॉर्ड को समय पर उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठाए. जस्टिस समीर जैन ने कहा कि यह समस्या केवल उस एक मामले तक सीमित नहीं है, जिसके चलते DGP को तलब किया गया था. कई मामलों में अदालत के आदेशों का पालन नहीं होने और जांच में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती हैं.
पीठ ने कहा कि पुलिस जांच सही तरीके से हो, यह सुनिश्चित करना DGP की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने विशेष रूप से जांच रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने पर भी चिंता जाहिर की.
‘हलफनामे में सब कुछ होता है, रिकॉर्ड मांगने पर फुटेज नहीं मिलती’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कई बार हलफनामे में जांच से जुड़ी तमाम जानकारियां दर्ज होती हैं, लेकिन जब अदालत वास्तविक रिकॉर्ड या सीसीटीवी फुटेज मांगती है तो वह उपलब्ध नहीं होती. पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में लगने वाले समय पर भी सवाल उठाया.
जस्टिस समीर जैन ने कहा कि पहले पुलिस को निर्देश देने के लिए 10 दिन तक का समय दिया जाता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में तीन दिन का समय पर्याप्त माना गया है.
DGP ने बताया क्या उठाए गए कदम?
हाईकोर्ट ने DGP राजीव कृष्णा से पूछा कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए पुलिस विभाग की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं. जवाब में DGP ने राज्य में दोषसिद्धि दर का हवाला दिया.
हालांकि, पीठ DGP के इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि दर का आंकड़ा खराब या गड़बड़ जांच से जुड़ी उसकी चिंता का समाधान नहीं करता. जस्टिस जैन ने कहा कि अदालतें जिन मामलों की सुनवाई करती हैं, उनमें जांच की वास्तविक स्थिति उनके सामने आती है.
समय पर कोर्ट तक कैसे पहुंचेगा पुलिस का जवाब?
पीठ ने DGP से यह भी पूछा कि पुलिस के निर्देश और संबंधित रिकॉर्ड समय पर अदालत तक पहुंचें, यह सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है. इस पर DGP ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए समितियां मौजूद हैं और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
किस मामले में DGP को किया गया था तलब?
दरअसल, पिछले महीने जस्टिस समीर जैन की पीठ पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी. यह मामला हत्या के आरोपों से जुड़ा था. सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अदालत के आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर पीठ ने नाराजगी जताई थी.
इसके बाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के DGP को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि पुलिस अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन करने में अनिच्छा क्यों दिखा रहे हैं. इसी आदेश के तहत मंगलवार को DGP राजीव कृष्णा हाईकोर्ट में पेश हुए.