Knews Desk- बिहार में मोबाइल चोरी के एक अनोखे और संगठित नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पटना पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके काम करने का तरीका किसी कंपनी के मॉडल जैसा था। इस गिरोह में चोरी करने वालों को बाकायदा कर्मचारी की तरह रखा जाता था, उन्हें हर महीने 9 हजार रुपये वेतन दिया जाता था और मोबाइल चोरी का मासिक टारगेट भी तय किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों को हर महीने कम से कम 30 मोबाइल चोरी करने का लक्ष्य दिया जाता था। जो सदस्य टारगेट से ज्यादा मोबाइल चोरी करते थे, उन्हें अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाता था। पटना पुलिस की इस कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 28 स्मार्टफोन, एक आईफोन और चोरी की एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
पुलिस ने यह कार्रवाई फतुहा के नदी थाना क्षेत्र के बांसतल गांव में की। पुलिस को सूचना मिली थी कि राहुल कुमार नाम का व्यक्ति चोरी के मोबाइलों की खरीद-बिक्री का काम करता है। जानकारी के आधार पर जब पुलिस ने उसके घर पर छापेमारी की तो बेडरूम से बड़ी संख्या में मोबाइल बरामद हुए। तलाशी के दौरान पुलिस को अलग-अलग कंपनियों के 28 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और एक महंगा आईफोन मिला। जब पुलिस ने इन मोबाइलों से जुड़े बिल और दस्तावेज मांगे तो आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद पुलिस ने राहुल कुमार और उसके भाई सन्नी कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस को घर के दूसरे कमरे से दो अन्य युवक भी मिले। पूछताछ में उन्होंने खुद को राहुल का कर्मचारी बताया। दोनों की पहचान झारखंड के साहेबगंज निवासी अजहर अंसारी और नूरआलम अंसारी के रूप में हुई। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे राहुल के लिए काम करते थे और उनका काम रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल चोरी करना था। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह चोरी की वारदातों को बाकायदा योजना बनाकर अंजाम देता था। चोरी करने वालों को वेतन के साथ टारगेट दिया जाता था। टारगेट पूरा नहीं करने पर उन्हें फटकार लगाई जाती थी, जबकि ज्यादा चोरी करने पर अतिरिक्त पैसे दिए जाते थे।
जांच में यह भी पता चला है कि बिहार के पटना, फतुहा और आसपास के इलाकों से चोरी किए गए मोबाइलों को झारखंड के साहेबगंज भेजा जाता था। वहां इन मोबाइलों को कम कीमत पर बेच दिया जाता था। राज्य की सीमा पार कर देने से पुलिस के लिए चोरी के मोबाइलों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह का कनेक्शन साइबर अपराध से भी जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि चोरी किए गए मोबाइलों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड या अन्य साइबर अपराधों में तो नहीं किया गया।
फतुहा एसडीपीओ-1 अवधेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी के मोबाइल किन-किन राज्यों में बेचे जाते थे और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से यह साफ हुआ है कि मोबाइल चोरी की घटनाएं अब केवल छोटे अपराध तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि कुछ गिरोह इन्हें संगठित तरीके और तय रणनीति के साथ अंजाम दे रहे हैं।